श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआमुख महावीरी व्याख्या
प्रभु अवतार कथा पुनि गाई।
तब शिशुचरित कहेसि मन लाई॥
यह दिग्दर्शन मात्र प्रस्तुत किया गया। पद्मावतकी समीक्षामें आचार्य रामचन्द्र
शुक्लने भी कहा है कि जायसीने सात-सात चौपाइयों अर्थात् सात-सात
पङ्क्तियोंके बाद दोहा रचा है। चौपाईका तात्पर्य चार यतियों वाले बत्तीस
(३२) मात्राओंके मात्रिक वृत्तसे है। महर्षि वाल्मीकिजीको जिस प्रकार
बत्तीस अक्षरों वाला अनुष्टुप् सिद्ध है, उसी प्रकार वाल्मीकिजीके अवतार
गोस्वामी तुलसीदासजीको बत्तीस मात्राओं वाली चौपाई सिद्ध है।
यह व्याख्या लगभग एक वर्ष पहले पूर्वदेशमें ही उपनिबद्ध की गई
थी। मुझे लगता है कि इसी हनुमान्-चालीसाकी व्याख्याके फलने दासको
रामभद्रदास कहलानेका सौभाग्य दे दिया। मुझे आशा ही नहीं, अपितु पूर्ण
विश्वास है कि इस ग्रन्थके अनुशीलनसे आस्तिक सनातन-धर्मी हनुमत्परायण
तथा श्रीमानसके कथावाचक महानुभाव परम सन्तोषका अनुभव करेंगे। मैं
समस्त वैष्णव सन्तोंके ही कर-कमलोंमें इस ग्रन्थोपहारको समर्पित कर
उनके पादपद्मोंमें साष्टाङ्ग प्रणत हो रहा हूँ।
श्रीवैष्णवेभ्यो नमो नमः।
इति निवेदयति राघवदीयः
रामभद्रदासः
फलाहारी आश्रम, अरैल
प्रयाग (उत्तरप्रदेश)
गङ्गा दशहरा, वि. सं. २०४१ (जून ८, १९८४ ई.)
परिशोधित-मार्गशीर्ष पूर्णिमा, वि. सं. २०७२ (दिसम्बर २५, २०१५ ई.)
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