श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary
गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा
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हनुमान्जीकी आरती
रचयिता–हिन्दूधर्मोद्धारक जगद्गुरु आद्य रामानन्दाचार्य¹
आरति कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट-दलन रघुनाथ-कला की॥ १ ॥
जाके बल गरजे महि काँपै।
रोग सोग जाके सिमाँ न चाँपै॥ २ ॥
अंजनी-सुत महाबल-दायक।
साधु संत पर सदा सहायक॥ ३ ॥
बाएँ भुजा सब असुर सँघारी।
दहिन भुजा सब संत उबारी॥ ४ ॥
लछिमन धरनि में मूर्छि पड़्यो।
पैठि पताल जमकातर तोड़्यो॥ ५ ॥
आनि सजीवन प्रान उबार्यो।
मही सबन कै भुजा उपार्यो॥ ६ ॥
गाढ़ परे कपि सुमिरौं तोहीं।
होहु दयाल देहु जस मोहीं॥ ७ ॥
लंका कोट समुंदर खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥ ८ ॥
¹ इस पदको आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, डॉ. श्यामसुन्दर दास, सर जॉर्ज ग्रियर्सन, और रामकुमार
वर्मा सदृश अनेक विद्वानोंने रामानन्दाचार्यजीकी रचना माना है।