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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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हनुमान्‌जीकी आरती महावीरी व्याख्या
लंक प्रजारि असुर सब मार्यो।
राजा राम कै काज सँवार्यो॥ ९ ॥
घंटा ताल झालरी बाजै।
जगमग जोति अवधपुर छाजै॥ १० ॥
जो हनुमान की आरति गावै।
बसि बैकुंठ परम पद पावै॥ ११ ॥
लंक बिधंस कियो रघुराई।
रामानन्द आरती गाई॥ १२ ॥
सुर नर मुनि सब करहिं आरती।
जै जै जै हनुमान लाल की॥ १३ ॥
डॉ. रामाधार शर्मा द्वारा संपादित प्रस्तुत पाठके स्रोत हैं—(१) डॉ. पीताम्बर दत्त
बड़थ्वाल (संपादित) (१९५५ ई.), रामानन्द की हिन्दी रचनाएँ (प्रथम संस्करण),
काशी: नागरी प्रचारिणी सभा, पृष्ठ ७; और (२) डॉ. बदरीनारायण श्रीवास्तव (१९५७
ई.), रामानन्द साहित्य तथा हिन्दी साहित्य पर उसका प्रभाव, प्रयाग: हिन्दी परिषद्
प्रयाग विश्वविद्यालय, पृष्ठ १३९। दोनों स्रोतोंमें कई पाठभेद हैं, यथामति समीचीन पाठ
ही यहाँ डॉ. रामाधार शर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया है—संपादक।
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