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शिवताण्डव स्तोत्रम् (लङ्काधिपति रावण प्रणीत - सान्वय संस्कृत मूल एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Shiva Tandava Stotram of Ravana

दशानन रावण (व्याख्याकार: पं. ज्वाला प्रसाद चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

( ४७ )
हुए सुगन्धमय पराग से मनोहर, परम शोभा के धाम श्री
शिवजी के अंगों की सुन्दरतायें परमानन्दयुक्त हमारे मन की
प्रसन्नता को सर्वदा बढ़ाती रहें ॥१४॥
प्रचंडवाडवानलप्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनीजनाबहूतजल्पना ।
विमुक्तवामलोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषणो जगज्जयाय जायताम् ॥१५॥
प्रचण्ड बड़वानल की भांति पापों को भस्म करने में स्त्री
स्वरूपिणी [अणिमादिक अष्ट महासिद्धियों तथा चंचल नेत्र
वाली देवकन्याओं से शिव विवाह के समय में गान की गई
मंगलध्वनि सब मन्त्रों में परम श्रेष्ठ शिव मन्त्र से पूरित,
सांसारिक दुःखों को नष्ट कर विजय पावें ॥१५॥
इमं हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं
पटन्स्मरबन्धु वन्नरो विशुद्धमेति सन्ततम् ।
हरे गुरौ स भक्तिमाशु याति नान्यथा गति
विमोहनं हि देहिना तु शंकरस्य चिन्तनम् ॥१६॥

( ४८ )
इस उत्तमोत्तम शिवताण्डव श्लोक को नित्य प्रति मुक्त
कण्ठ से पढ़ने से या श्रवण करने से सन्तति वगैरह से पूर्ण हरि
और गुरु में भक्ति बनी रहती है जिसकी दूसरी गति नहीं होती
शिव की ही शरण में रहता है ॥१६॥
पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं
यः शम्भुपूजनपरं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरंगयुक्तां
लक्ष्मीं सदैव सुमुखीं प्रददाति शंभुः ॥१७॥
शिव पूजा के अन्त में इस रावणकृत शिवताण्डव स्तोत्र
का प्रदोष समय में गान करते से पढ़ने से लक्ष्मी स्थिर रहती
है । रथ, गज, घोड़ा से युवत सर्वदा रहता है ॥१७॥
इति श्रीरावणविरचितं शिवतांडवस्तोत्रं भाषाटीका सहितं संपूर्णम
॥ श्रीशिवार्पणमस्तु ॥

K. P. SABHA AMBPHALLA
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JAMMU

भगवान के पांच विचित्र अवतारों की कथा
लेखक — स्वामी श्री अखण्डानंद जी महाराज
पुस्तक रूप में प्रस्तुत श्री मत्स्यावतार कथा, कच्छपावतार कथा, वराहावतार कथा,
वामनावतार कथा तथा नृसिंहावतार कथा में लेखक ने जन साधारण को यह रोचक
कथाऐं तो उपलब्ध कराई ही हैं तथा ये भी बताया है कि भगवान की महिमा अनंत
है। निर्गुण-निराकार, सगुण-साकार सब उन्हीं का स्वरूप है। बुद्धि जितना सोच सकती
है, जितना आकलन कर सकती है और जितना बड़ा काल्पनिक मानचित्र बना सकती
है उसके भी परे, बहुत परे भगवान विराजमान हैं। मन वहां नहीं पहुँच सकता, वाणी
उनका वर्णन नहीं कर सकती। हमारे पास देखने और जानने के जितने साधन हैं उनके
बल पर हम भगवान को नहीं पा सकते। वे स्वयं ही कृपा करके जिस पर अपनी
महिमा प्रकट कर दें और अपने दर्शन तथा अनुभव का अधिकारी चुन लें, वही उन
तक पहुँच सकता है।
नीति ग्रन्थों के अमृत कण
संग्रहकर्ता — बाल कृष्ण मुज़तर
हिन्दू शास्त्रों और विभिन्न नीति ग्रन्थों में वर्णित सामान्य जीवन और व्यवहार के लिये
उपयोगी महापुरुषों का विवेक विचार। प्रत्येक आयु के पाठक के लिये एक उपयोगी
पुस्तक।
ज्ञान की राह दिखाने वाले
महापुरुषों के अनमोल वचन
संग्रह और सम्पादन — नंदलाल दशोरा
जितना ही हम अध्ययन करते हैं उतना ही हमें अज्ञान का आभास होता जाता है।
पढ़ना तो सभी जानते हैं लेकिन क्या पढ़ना चाहिये ये पुस्तक आपको यह सोचने पर
मजबूर करेगी कि आपको क्या पढ़ना चाहिए।
रणधीर बुक सेल्स (प्रकाशन) हरिद्वार