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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 65

४६ शालिहोत्रम् ।
सातवां उपाय-अकड़टैया जड, फल, फूल, पत्ते समेत आग
जलावे उसमें से दो छटांक लेकर जौं के आटे में मिला गोली
बना दोनों समय चार पांच दिन तक देवे ।
आठवां उपाय-सेर भर अजवायन को आदमी के मूत्र में तीन
दिनतक भिगोवे फिर सायंकालके समय दाना देनेके पीछे इसमें
से जौंके आटेमें एक पैसे भर मिला गोला सा बना चार पांच
दिन तक खिलाना चाहिये ।
जुखाममें नाक टपकनेकी दवा-रोगी घोडेको दाना देनेके पी-
छे दो दिन तक भुनी हुई अदरक जौंके आटेमें मिलाकर देवे फिर
दो दिन तक दाना देने के पीछे एक छुहारा देवै ।
दूसरा उपाय-जो जुखाम के कारण आंख पीली पड गई हो तो
दस बारह दिनतक पावभर मेथी दाना और पैसे भर कालीमिरच
को पीसकर दोनों को मिला कर देता रहे ।
तीसरा उपाय-हींग छः रत्ती, सोंठ ४ माशे इन दोनों को
पीस जौं के आटे में मिला दाना देने के पीछे चार पांच दिन
तक देता रहे ।
कुरकुरी का वर्णन-यूनानी शालहोत्र वालों ने इस रोग को
सात प्रकार का लिखा है और डाक्टर लोग इसे केवल दो ही
प्रकार का बताते हैं [ १ ] मूत्र बन्द होने से [ २ ] दस्त बन्द
होनेसे यह रोग बहुधा खाने पीने की समता विषमता से हुआ
करता है। इसमें घोडेके मुखसे पानी टपका करता है, और प-
सीना अधिक निकलता है, न वह लेट सकता है न बैठता है
और कभी २ चारों पैरों को फैलाकर लेटता है, उसके पेट में
बहुत पीडा मालूम होती है ।