शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशालिहोत्रम् । ४५
जल्दी नाक में घुमे ऐसा करने से दूसरे नथने में होकर कफ
निकल जायगा तीन चार दिन तक ऐसा करने से घोडा को
आराम होजाता है।
तीसरा उपाय-संभालू के पत्तों का रस निचोड कर तीन तीन
चार चार बूंद दोनों नथनों में टपकाकर उन छिद्रोंको रुईसे बंद
कर देवे फिर चार पांच मिनट पीछे रुई को निकाल लेवे तौ
कफ गिरना आरम्भ होजायगा, इसी तरह पांच चार दिन तक
दिन में दो दो तीन तीन बार करने से पशु को आराम हो-
जाता है।
चौथा उपाय-बडे घोडे को एक बादाम की मिंगी और छोटे
को आधी मिंगी दो तीन दिन तक दिनमें दोतीन बार देवै।
पांचवा उपाय-प्याज आध सेर, घृत पावभर और बकरे का
सिर इन तीनोंको कूटकर ढाई सेर पानी के साथ आगपर चढादे
नीचे मंदी मंदी आग देता रहे, जब बारह घंटे होजाय और
अधसेर जल रह जाय तब इसमें थोडासा नमक अंदाजसे डाल
देवे, और दाना खिलाने के पीछे इस जलसे बेसन के आटे को
मांडकर रोटी बना खिला देवै परन्तु उस दिन पानी न पिलावै
फिर दूसरे दिन घास और दाना खिलाकर पानी पिलाना चाहिए
यह औषधि अत्यन्त बलहीन घोडेको बहुत लाभकारी है ।
छठा उपाय-रोग की दशा में घोडे को पानी पिलाने के पीछे
एक प्याज खिला देनी चाहिए, पीछे बांस की थोडी सी हरी
पत्तियां खाने को देवै।