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सर्वकोश
शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 57

३८ शालिहोत्रम् ।
देती है, स्वस्थावस्था में इसकी गति एक मिनट में ४० वार
होती है, इससे न्यूनाधिक के होने पर इसकी स्वस्थता में अंतर
समझा जाता है।
मूत्रपरीक्षा-मूत्रकी रंगत सफेद हो तो सर्दी, पीली और गाढ़ी
हो तो वात कफकी अधिकता और लालहो तो गर्मीकी अधि-
कता जानी जाती है।
नेत्रपरीक्षा-आंखका रंग देखने से भी घोडे की बीमारी की
परीक्षा होती है। घोडेकी आंखका पलक उंगलीसे उठाकर देखे
जो उसकी रंगत गुलाबी हो तो निरोगी समझना चाहिये सफेद
हो तौ कफकी अधिकता पीली हो तौ वादीकी अधिकता और
ललाई होवै तौ गरमी की अधिकता समझनी चाहिये। जो
ललाई में कालापन भी हो तौ घोडे के बचने की आशा नहीं
रहती है।
मलपरीक्षा-जो घोडेके पतले दस्त आते हैं और दुर्गन्ध भी
उठती हो तौ पशुको अजीर्ण रोग समझना चाहिये और जो
उपाय करने पर भी दस्त जारी रहे तौ दस्तों की बीमारी
समझी जाती है।
आंखके रोग उनकी पहचान और दवा।
जिस घोडेकी आंखमें कोई झटका लग गयाहो जिससे पानी
बहता हो और आंखकी रंगत नारंगीके समान होगई हो तौ
पहिले दिन सायंकालके समय मिट्टी के एक पात्र में त्रिफला को
कूट करके भिगो देवे, दूसरे दिन प्रातःकाल उसे छानकर घोडे
की आंखमें छींटा मारे इस तरह दो तीन दिन करने से आराम
हो जायगा।