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शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)

Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra

महर्षि शालिहोत्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 58

शालिहोत्रम् । ३६
जो चोट लगने से आंखमें ललाई आगई हो तो दो तीन
दिन तक नमक और फिटकरीके पानीसे धो डाले ।
अन्य दवा-समंदरफेन, पके हुए चावलों का माढ और शहद
तीनोंको मिलाकर आंखमें अंजन की तरह लगावै ।
आंखकी फूलीका इलाज-आंखकी फूलीके विषय में वे उपाय
काममें लाने चाहिये जो गौके आंखके रोगमें लिखे गएहैं उनके
सिवाय नीचे लिखे उपाय भी करे ।
पहिली दवा-साठी चावलको आकके दूधमें भिगोकर छायामें
सुखाके फिर इन्हें मिट्टीके पात्रमें भर आगपर जलाले, जबराख
होजाय तबनीचे लिखीदवा और मिलाले । सिरसके बीज दोतोले
हरे कांचकी चूड़ी दस माशे, लाहौरी नमक दो तोला इन सब
को बारीक पीस कपड़छन कर फूली पर लगावे ।
दूसरी दवा-फूली हुई फिटकरी और उसके बराबर ही सिंदूर
मिलाकर पीसले । इसमें से पांच वा छः रत्ती प्रतिदिन दो चार
आंख में फूली पर लगाता रहे ।
तीसरी दवा-मनुष्यकामूत्र लेकर घोडेकी आंखपर छींटा मारे
चौथी दवा-सांभर नमक और वंगलापन पीसकर पानी में
घोलकर मुँहमें भर २ कर घोडे की आंख पर दोतीन दिन तक
कुल्ले करे ।
पांचवीं दवा-सिंदूर और चीनी सुर्मे की तरह महीन पीसकर
आंखों में लगावै ।
छटी दवा-पत्थर का नमक शहद में मिलाकर आंखमें अंजन
लगावै ।