शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशालिहोत्र । १०१
ज, कचरी. मेथी, मस्तंगी,बङ्ग, अदरख, गुगल, कुचला, इलायची,
पीपल लोंग, स्याहजीरा, सफेदजीरा, अरनी, असगन्ध, धाय के
फूल, कवांच के बीज,इन्द्रायणकी जड, जायफल, कवावा, इन्द्र-
जौ, तज, अतरज, आंवला, गिलोय, भङ्ग, भारङ्गी, भिलावा,
हल्दी, सोंठ, सोंफ, सतुआ, गन्धक, वायविडंग, काली मिरच,
घुड़बच, वेलगिरी, खारी नमक, असखार; सांभर नमक, सज्जी,
जवाखार, काला नमक, सहजने की छाल, चिरायता, देवदारू,
दारुहल्दी, जंगली कनेर की छाल और पोहकर मूल सबको
आध २ सेर ले और जायफल टकाभर ले सबको मिलाकर
कूट छानकर नीबू के अर्क में भिगोकर सुखाले, फिर दही में
भिगोकर सुखाले इसमें से प्रतिदिन आठ या नौ दिरम गुड के
साथ खिलावे और जो किसी प्रकार की बीमारी हो तो सत्तू
के साथ दाना खाने के पश्चात् खिलावे ।
रूमी चूर्ण-यह चूर्ण बहुत लाभदायक है, इससे जहरवाद
बादो और कफ आदिक अनेक रोग दूर होते हैं तथा यह
प्रत्येक ऋतु में लाभदायक होता है ।
दवा-अजमोद, चिरायता, जवाखार, काकडासिंगी, कूट वि-
लास पापडा, कुटकी, तीखर, पापल, सम्हालू के पत्ता, गुगल,
चीता, मरोड़फली, पीपलामूल प्रत्येक पावभर प्याज, बन्दाल
हल्दी, सोंठ, हर्रा, बहेडा, कचरी, सहजनेकी छाल और पोदीना प्रत्ये
क एकसेर, सेंधा नमक, काला नमक, सांभर नमक, पांगा नमक,
घुड़बच, सज्जी, राई, काली जीरी; अदरख, कालीमिरच, इन्द्रजौ
देसी अजवायन, गिलोय, वेलगिरी, भंग, मँगरेला, दोनोंजीरे,नीम
के पत्ता, बकायनका पत्ता, इन्द्रायनका सूखा फल और छोटी हरड