शालिहोत्रम्: अश्वशास्त्र (महर्षि शालिहोत्र - प्राचीन भारतीय अश्व-चिकित्सा एवं लक्षण विज्ञान)
Shalihotram Ashvashastra of Maharshi Shalihotra
महर्षि शालिहोत्र द्वारा
पृष्ठ 119, कुल 130 में से
संदर्भ में पढ़ें१०० शालिहोत्रम् ।
कलोंजी, अस्पन्द, सांभर नमक, कुटकी, मिरच, हलहुल के बीज
विलायपापडा, काकडासिंगी, कडेसर, काला जीरा; सुहागा, सों-
चर नमक हल्दी वंग प्रत्येक आध २ पाव कचरी और मेथी
प्रत्येक आध २ सेर सएजने की छाल, चार सेर और लोध आध
पाव इन सबको कूट छानकर आध २ पाव की मात्रा दाना देनेके
पहिले घोडे को खिलावै अगर दाने के पीछे दे तो भी कुछ हर्ज
नहीं है ।
हूत्रनिगार बनाने की विधि-राई, वन्दाल, हींग पीपल, भिला-
वा डींग चीता कुटकी तिल और अदरक इन सबको कूटकर
बेर की बराबर गोली बनावे । एक गोली नित्य संध्या के समय
खिलावै और कायदा रक्खे ।
सादिकुलनफा चूर्ण-त्रिफला, सोंठ, लालमिरच, सोवा, हुलहुल
के बीज, गुरच, जंगी हरड प्रत्येक पावभर, अजवायन और क-
चरी प्रत्येक एकसेर, असगंध, पीपलामूल, चीता, बेलपस, अक्र-
रकरह, इन्द्रजौ, पीपल और शातरा प्रत्येक एक २ छटांक घुड़-
वच सज्जी काला नमक, सोंफ कत, मूली के बीज, मैनफल,
कालेसेर वन्दाल प्रत्येक आध २ पाव, राई सवासेर, कुटकी सवा
सेर, हल्दी लहसन और खारी प्रत्येक आधसेर सांभर नमक
तीन पाव हींग तीन दाम और पोहकर मूल तीन दामले । सबको
कूटकर और छानकर तीन सेर सिरके में भिगोकर सुखाले और
एक छटांक रातिव के पश्चात् नित्य खिलावै ।
मुफ्ताहुलनफा चूर्ण-राई अजवायन बहेड़ा हरड सरशफ
असवन्द, मुसव्वर, बोल, अजमोद, काकडासिंगी, अंजीर के बी-