षड्विंश ब्राह्मण (सामवेद का अद्भुत ब्राह्मण - दैव-उत्पात शान्ति विधान सटीक)
Shadvimsha Brahmana of the Samaveda with Commentary
सामवेदीय वैदिक ऋषि मण्डल द्वारा
पृष्ठ 180, कुल 226 में से
संदर्भ में पढ़ें.
Wait, "समाश्च"? Yes, "समाश्च."
12. T. यूपस्याश्री०, T. यूपाणि श्रितः ०, RKI. यूपाश्रित० for यूपाश्रि०;
JT. सप्रतिज्ञं for प्रतिज्ञापूर्वं.
13. RM. ०श्रीदैवतानि, T. ०श्रीदैवत्यानि, for ०श्रिदेवतानि.
14. TMK. ०स्तास्त आ० for ०स्तास्वा०; M. आदित्या रुद्रा मरुतो for
आदित्यरुद्रमरुद् .
Wait, let's verify line numbers:
Page header:
१८० षड्विंशब्राह्मणम्
Let's look at line 6 again:
"प्रतिज्ञातेष्वनुपादेयान् दर्शयति—"
Wait, look at line 6:
Can we see the characters clearly?
प्र ति ज्ञा ते ष्त्व नु पा दे या न्
Yes, "प्रतिज्ञातेष्वनुपादेयान्".
Let's check every word of the main text and commentary:
L1:
तत्र तेषु वर्जनीया भवन्ति गडुलो ग्रन्थियुक्तः । व्रणिलः पक्षादि- (or पश्वादि-? Footnote says: "R. ०भ