सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)
Sarvarthasiddhi of Acharya Pujyapada on Tattvartha Sutra with Commentary
आचार्य उमास्वामी / पूज्यपाद (टीकाकार: पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३८० सर्वार्थसिद्धि
१७.५ अपर्याप्तावस्थायां देवानां कथमोपशमिकं तद्यु-
क्तानां मरणासंभवात् । तदनुपपन्नं मिथ्यात्वपूर्वकोप-
शमिकयुक्तानामेव मरणासंभवात्, वेदकपूर्वका औप-
शमिकयुक्तास्तु नियमेन श्रेण्यारोहणं कुर्वन्तीति श्रेण्या-
रूढान् चारित्रमोहोपशमेन सह श्रुतानपेक्षयापर्याप्ता-
वस्थायामपि देवानामोपशमिकं संभवति ।
[ शंका—अपर्याप्त अवस्था में देवोंके कैसे औपश-
मिक सम्यक्त्व हो सकता है क्योंकि औपशमिकसम्य-
क्त्वसे युक्त जीवोंका मरण असंभव है ? उत्तर—ऐसा
कहना ठीक नहीं है। जो जीव मिथ्यात्व गुणस्थानसे
औपशमिक सम्यक्त्वको प्राप्त करते हैं उनका ही मरण
असंभव है किन्तु जो वेदकसम्यक्त्वपूर्वक औपशमिक
सम्यक्त्वसे युक्त होते हैं वे नियमसे श्रेणिपर आरोहण
करते हैं। श्रेणिपर आरूढ होकर चारित्रमोहनीय