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सर्वकोश
सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)

सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)

Sarvarthasiddhi of Acharya Pujyapada on Tattvartha Sutra with Commentary

आचार्य उमास्वामी / पूज्यपाद (टीकाकार: पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

पृष्ठ 306, कुल 558 में से

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पृष्ठ 306

१९४ सर्वार्थसिद्धौ [ ४।३६ § ५११ -
§ ५११. 'च'शब्दः किमर्थः । प्रकृतसमुच्चयार्थः । किं च प्रकृतम् । 'परतः परतः पूर्वापूर्वा-
ऽनन्तरा' अपरा स्थितिरिति । तेनायमर्थो लक्ष्यते-रत्नप्रभायां नारकाणां परा स्थितिरेकं सागरोप-
मम् । सा शर्कराप्रभायां जघन्या । शर्कराप्रभायामुत्कृष्टा स्थितिरस्त्रीणि सागरोपमाणि । सा
वालुकाप्रभायां जघन्येत्यादि ।
§ ५१२. एवं द्वितीयादिषु जघन्या स्थितिरुक्ता । प्रथमायां का जघन्येति तत्प्रदर्शनार्थमाह-
दशवर्षसहस्राणि प्रथमायाम् ॥३६॥
§ ५१३. अपरा स्थितिरित्यनुवर्तते¹ । रत्नप्रभायां दशवर्षसहस्राणि अपरा स्थितिवेदितव्या ।
§ ५१४. अथ भवनवासिनां का जघन्या स्थितिरित्यत आह-
भवनेषु च ॥३७॥
§ ५१५. 'च' शब्द किमर्थः । प्रकृतसमुच्चयार्थः । तेन भवनवासिनामपरा स्थितिर्दशवर्ष-
सहस्राणीत्यभिसंबध्यते ।
§ ५१६. व्यन्तराणां तर्हि का जघन्या स्थितिरित्यत आह-
व्यन्तराणां च ॥३८॥
§ ५१७. 'च'शब्दः प्रकृतसमुच्चयार्थः । तेन व्यन्तराणामपरा स्थितिर्दशवर्षसहस्राणीत्यव-
गम्यते ।
§ ५११. शंका-सूत्र में 'च' शब्द किसलिए दिया है ? समाधान-प्रकृत विषयका समुच्चय
करनेके लिए 'च' शब्द दिया है। शंका-क्या प्रकृत है ? समाधान-'परतः परतः पूर्वा पूर्वाऽनन्तरा
अपरा स्थितिः' यह प्रकृत है 'च' शब्द से इसका समुच्चय हो जाता है। इससे यह अर्थ प्राप्त होता
है कि रत्नप्रभामें नारकियोंकी उत्कृष्ट स्थिति जो एक सागर है वह शर्कराप्रभामें जघन्य स्थिति
है । शर्कराप्रभामें उत्कृष्ट स्थिति जो तीन सागर है वह वालुका प्रभामें जघन्य स्थिति है इत्यादि ।
§ ५१२. इस प्रकार द्वितीयादि नरकोंमें जघन्य स्थिति कही । प्रथम नरकमें जघन्य स्थिति
कितनी है अब यह बतलाने के लिए आगेका सूत्र कहते हैं-
प्रथम भूमिमें दस हजार वर्ष जघन्य स्थिति है ॥३६॥
§ ५१३. इस सूत्रमें 'अपरा स्थितिः' इस पदकी अनुवृत्ति होती है। तात्पर्य यह है कि
रत्नप्रभा पृथिवीमें दस हजार वर्ष जघन्य स्थिति है।
§ ५१४. अब भवनवासियों की जघन्य स्थिति कितनी है यह बतलानेके लिए आगेका सूत्र
कहते हैं-
भवनवासियों में भी दस हजार वर्ष जघन्य स्थिति है ॥३७॥
§ ५१५. शंका-सूत्रमें 'च' शब्द किसलिए दिया है ? समाधान-प्रकृत विषयका समुच्चय
करनेके लिए। इससे ऐसा अर्थ घटित होता है कि भवनवासियोंकी जघन्य स्थिति दस हजार
वर्ष है।
§ ५१६. तो व्यन्तरोंकी जघन्य स्थिति कितनी है अब यह बतलानेके लिए आगेका सूत्र
कहते हैं-
व्यन्तरों की दस हजार वर्ष जघन्य स्थिति है ॥३८॥
§ ५१७. सूत्रमें 'च' शब्द प्रकृत विषयका समुच्चय करनेके लिए दिया है। इससे ऐसा
अर्थ घटित होता है कि व्यन्तरोंकी जघन्य स्थिति दस हजार वर्ष है।
१. -र्तते । अथ भवन-आ०, दि० १, दि० २ ।