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सर्वकोश
सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)

सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)

Sarvarthasiddhi of Acharya Pujyapada on Tattvartha Sutra with Commentary

आचार्य उमास्वामी / पूज्यपाद (टीकाकार: पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished558 पृष्ठ

पृष्ठ 258, कुल 558 में से

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पृष्ठ 258

पादिकादीनां बाह्यनिमित्तवशादायुरपवर्त्यते, इत्ययं नियमः । इतरेषामनियमः । चरमस्य देहस्यो-
त्कृष्टत्वप्रदर्शनार्थमुत्तमग्रहणं नार्थान्तरविशेषोऽस्ति । चरमदेहा इति वा पाठः¹ ।
इति तत्त्वार्थवृत्तौ सर्वार्थसिद्धिसंज्ञाकायां द्वितीयोऽध्यायः ॥२॥
विशेषार्थ—भुज्यमान आयुका उत्कर्षण नहीं होता केवल उदीरणा होकर आयु घट सकती
है, इसलिए प्रश्न होता है कि क्या सब संसारी जीवोंकी आयुका ह्रास होता है या इसका भी कोई
अपवाद है। इसी प्रश्नके उत्तर स्वरूप प्रकृत सूत्रकी रचना हुई है। इसमें बतलाया है कि उपपाद-
जन्मवाले देव ओर नारकी, तद्भवमोक्षगामी मनुष्य और असंख्यात वर्षकी आयुवाले तिर्यंच और
मनुष्य इनकी आयुका ह्रास नहीं होता। इन्हें जो आयु प्राप्त होती है उसका पूरा भोग होकर ही
उस पर्यायका अन्त होता है। यह विशेष नियम करनेका कारण यह है कि कर्मशास्त्रके अनुसार
कोई भी अधिक स्थितिवाला कर्म कारणविशेषके मिलनेपर अल्पकालमें भोगा जा सकता है।
भुज्यमान आयुपर भी यह नियम लागू होता है, इसलिए इस सूत्र-द्वारा यह व्यवस्था दी