सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 27, कुल 267 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 27

१८ शब्द संग्रह
तेरा साहिब है घट माहीं, बाहर नैना क्याँ खोलै ॥५॥
कहै कबीर सुनो भाई साधो, साहिब मिल गये तिल ओले१॥६
॥ सतसंग ॥
मैं तो आन पड़ी चोरन के नगर, सतसंग बिना जिय तरसे॥१
इस सतसँग मैं लाभ बहुत है, तुरत मिलावै गुरु से ॥२॥
मूरख जन कोई सार न जानै, सतसँग मैं अमृत बरसे ॥३॥
सबद सा हीरा पटकि हाथ से, मुट्ठी भरी कंकर से ॥४॥
कहै कबीर सुनो भाई साधो, सुरत करो वहि घर से ॥
॥ भेद बानी ॥
(१)
सार सबद गहि बाचिहौ२, मानौ इतबारा ॥ १॥
सत्त पुरुष अच्छै बिरिछ, निरंजन डारा ॥ २॥
तीन देव साखा भये, पाती संसारा ॥ ३॥
ब्रह्मा बेद सही किया, सिव जोग पसारा ॥ ४॥
ब्रिसनु माया परगट किया, उरले३ ब्योहारा ॥ ५॥
तिरदेवा ब्याधा४ भये, लिये बिष का चारा ॥ ६॥
कर्म की बंसी डारि के, फाँसा संसारा ॥ ७॥
जोति सरूपी हाकिमा, जिन अमल पसारा ॥ ८॥
तीन लोक दसहूँ दिसा, जम रोके द्वारा ॥ ९॥
अमल मिटावौं ताहि का, पठवौं भव पारा ॥१०॥
कह कबीर अम्मर करौं, जो होय हमारा ॥११॥
(२)
अहरम होय सो जानै साधो, ऐसा देस हमारा ॥टेक॥
बेद कतेब पार नहिँ पावत, कहन सुनन से न्यारा ।
जाति बरन कुल किरिया नाहीं, संध्या नेम अचारा ॥१॥
(१) ओट । (२) बचोगे । (३) इधर का अर्थात पिंड देश का । (४) चिड़ीमार ।