संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४० शब्द संग्रह
करम काल बस उद्र१ निहारा ।
जग बिच मूढ़ जिया न जिया ॥ २ ॥
अगम राह रस रीति न जानी ।
बहु सतसंग किया न किया ॥ ३ ॥
नाम अमल घट घोंटि न पीया ।
अमल अनेक पिया न पिया ॥ ४ ॥
मोटे मात जात ज़िंदगी मैं ।
सिर धरि पैर छुवा न छुवा ॥ ५ ॥
तुलसीदास साध नहिँ चीन्हा ।
तन मन धन न दिया न दिया ॥ ६ ॥
(३)
अरिल
संत मता है सार और सब जाल पसारा ।
परमहंस जग भेष बहे सब मन की लारा ॥
संत बिना नहिँ घाट बाट एको नहिँ पावै ।
अरे हाँ रे तुलसी अटक भटकि भ्रमखान संत बिन भव मैं आवै ॥
(४)
अरिल
भव जल अगम अथाह थाह नहिँ मिलै ठिकाना ।
सतगुरु केवट मिलै पार घर अपना जाना ॥
जग रचना जंजाल जीव माया ने घेरा ।
अरे हाँ रे तुलसी लोभ मोह बस परे करैं चौरासी फेरा ॥
॥ चितावनी ॥
(१)
रेख़्ता
जगत मद मान मैं माता । खुदी का खौफ नहिँ लाता ॥
कजा सिर पर खड़ी द्वारे । फिरिस्ते तीर तकि मारे ॥१॥
(१) पेट ।