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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 23, कुल 267 में से

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पृष्ठ 23

१४ शब्द संग्रह
घायल की गति घायल जानै, क्या जानै जाति पतंगी हो ॥३॥
कहै कबीर सुनो भाई साधो, निसि दिन प्रेम उमंगी हो ॥४॥
(६)
हमन हैं इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या ।
रहें आजाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ॥१॥
जो बिछुड़े हैं पियारे से, भटकते दर बदर फिरते ।
हमारा यार है हम मैं, हमन को इन्तिजारी क्या ॥२॥
खलक सब नाम अपने को, बहुत कर सिर पटकता है ।
हमन गुरु नाम साचा है, हमन दुनिया से यारी क्या ॥३॥
न पल बिछुड़ पिया हम से, न हम बिछुड़ैं पियारे से ।
उन्हीं से नेह लागी है, हमन को बेकरारी क्या ॥४॥
कबीरा इश्क का माता, दुई को दूर कर दिल से ।
जो चलना राह नाजुक है, हमन सिर बोझ भारी क्या ॥५॥
(७)
मन लागो मेरो यार फकीरी मैं ॥ टेक ॥
जो सुख पावो नाम भजन मैं, सो सुख नाहिं अमीरी मैं ॥१
भला बुरा सब को सुनि लीजै, कर गुजरान गरीबी मैं ॥२॥
प्रेम नगर मैं रहनि हमारी, भलि बनि आई सबूरी मैं ॥३॥
हाथ मैं कूँड़ी बगल मैं सोंटा, चारो दिसि जागीरी मैं ॥४॥
आखिर यह तन खाक मिलेगा, कहा फिरत मगरूरी मैं ॥५
कहै कबीर सुनो भाई साधो, साहिब मिलै सबूरी मैं ॥६॥
(८)
साधो सहज समाधि भली ।
गुरु प्रताप जा दिन से जागो, दिन दिन अधिक चली ॥१
जहँ जहँ डोलौं सो परिकरमा, जो कछु करौं सो सेवा ।
जब सोवौं तब करौं दंडवत, पूजौँ और न देवा ॥२॥