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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

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पृष्ठ 207

१६८ शब्द संग्रह
बाँदी-जाद१ गुलाम, गुलाम गुलाम है।
खड़ा रहै दरबार, सु आठो जाम है॥३॥
सेवक तलबदार२, तुम्हरे दर कूकहीँ।
औगुन अनँत अपार, परी मोहिँ चूक हीँ॥४॥
मैं घर का बन्दाजादा, अरज मेरि मानिये।
कहता दास गरीब, अपन कर जानिये॥५॥
॥ साध महिमा ॥
सोई साध अगाध है, आपा न सरावै३।
पर-निंदा नहिँ संचरै, चुगली नहिँ खावै॥१॥
काम क्रोध त्रिसना नहीं, आसा नहिँ राखै।
साचे सूँ परचा भया, जब कूड न भाखै॥२॥
एकै नजर निरंजना, सबही घट देखै।
ऊँच नीच अंतर नहीं, सब एकै पेखै॥३॥
सोई साध सिरोमनी, जप तप उपकारी।
भूले कूँ उपदेस दे, दुर्लभ संसारी॥४॥
अकल४ यकीन पठाय दे, भूले कूँ चेतै।
सो साधू संसार मैं, हम बिरले भँटै॥५॥
सूतक५ खोवै सत कहै, साचे सूँ लावै।
सो साधू संसार मैं, हम बिरले पावै॥६॥
निरख निरख पग धरत हैं, जिव हिंसा नाहीं।
चौरासी तारन तरन, आये जग माहीं॥७॥
इस सौदे कूँ उतरे, सौदागर सोई।
भरे जहाज उतारि दे, भौसागर लोई॥८॥
(१) लौंडी-बच्चा। (२) तनख़ाह पाने वाले। (३) सराह्रै। (४) बुद्धि।
(५) अशुद्धता।