संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६४ शब्द संग्रह
नीकी बार बिचार देव । परन राखि या कूँ जु सेव ॥४॥
रखवारी करु हेत हेत । जब तेरी होवै जैत जैत ॥५॥
खोट कपट पंछी उड़ाव । मोह प्यास सबही जलाव ॥६॥
सँभलै बाड़ी नऊ अंग । प्रेम फूल फुलै रंग रंग ॥७॥
पुहुप गूँध माला बनाव । आदि पुरुष कूँ जा चढ़ाव ॥८॥
तौ सहजो बाई चरनदास । तेरे मन की पुरवैँ सकल आस९
दया बाई
[ संक्षिप्त जीवन-चरित्र के लिये देखो संतबानी संग्रह भाग १ पृष्ठ १६७ ]
गुरु बिन ज्ञान ध्यान नहिँ होवै ।
गुरु बिन चौरासी मग जोवै ॥ १ ॥
गुरु बिन राम भक्ति नहिँ जागै ।
गुरु बिन असुभ कर्म नहिँ त्यागै ॥ २ ॥
गुरु ही दीन-दयाल गुसाईँ ।
गुरु सरनै जो कोई जाई ॥ ३ ॥
पलटैँ करैँ काग सूँ हंसा ।
मन को मेटत हैं सब संसा ॥ ४ ॥
गुरु हैं सब देवन के देवा ।
गुरु को कोउ न जानत भेवा ॥ ५ ॥
करुना-सागर कृपा-निधाना ।
गुरु हैं ब्रह्म रूप भगवाना ॥ ६ ॥
दै उपदेस करैँ भ्रम नासा ।
“दया” देत सुख-सागर बासा ॥ ७ ॥