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संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 18, कुल 267 में से

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पृष्ठ 18

कबीर साहिब ६
(१३)
होली
आई गवनवाँ की सारी, उमिरि अबहीँ मोरी वारी ॥टेक॥
साज समाज पिया लै आये, और कहरिया चारी ।
वम्हना बेदरदी अचरा पकरि कै, जोरत गँठिया हमारी ।
सखी सब पारत गारी ॥ १ ॥
विधि¹ गति वाम कछु समझ परत ना, वैरी भई महतारी ।
रोय रोय अँखियाँ मोर पोंछत, घरवाँ से देत निकारी ।
भई सब का हम भारी ॥ २ ॥
गवन कराय पिया लै चाले, इत उत बाट निहारी ।
छूटत गाँव नगर से नाता, छूटै महल अटारी ।
करम गति टरै न टारी ॥ ३ ॥
नदिया किनारे बलम मोर रसिया, दीन्ह घुँघट पट टारी ।
थरथराय तन काँपन लागे, काहू न देख हमारी ।
पिया लै आये गोहारी ॥ ४ ॥
कहै कबीर सुनो भाई साधो, यह पद लेहु विचारी ।
अब के गौना बहुरि नहिँ औना, करिले भेंट अँकवारी ।
एक बेर मिलि ले प्यारी ॥ ५ ॥
॥ लय ॥
जो कोइ या बिधि मन को लगावै, मन के लगाये प्रभु पावै१
जैसे नटवा चढ़त बाँस पर, ढोलिया ढोल बजावै ।
अपना बोझ धरै सिर ऊपर, सुरति बरत² पर लावै ॥२॥
जैसे भुवंगम³ चरत बनहिँ मैं, ओस चाटने आवै ।
कभी चाटै कभी मनि तन चितवै, मनि तजि प्रान गँवावै॥३
(१) ब्रह्मा । (२) डोरी । (३) साँप ।