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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 16, कुल 267 में से

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पृष्ठ 16

कबीर साहित्य ७
(७)
और मुए का सोग करीजै, तौ कीजै जो आपन जीजै ॥१॥
मैं नहिँ मरौँ मरै संसारा, अब मोहिँ मिला जियावनहारा २
या देही परिमल महकंदा, ता सुख बिसरे परमानन्दा॥३
कुअटा१ एक पंच पनिहारी, टूटी लेजुरि२ भरैँ मतिहारी३॥४
कह कबीर इक बुद्धि विचारी, नावह कुअटाना पनिहारी ॥५
(८)
टुक जिंदगी बँदगी कर लेना, क्या माया मद मस्ताना॥टेक
रथ घोड़े सुखपाल पालकी, हाथी औ वाहन नाना ।
तेरा ठाठ काठ की टाटी, यह चढ़ चलना समसाना४ ॥१
रूम पाट५ पाटम्बर अम्बर, जरी बफ़्त का बाना।
तेरे काज गजी गज चारिक६, भरा रहै तोसाखाना ॥२॥
खर्चे की तदबीर करो तुम, मंजिल लंबी जाना ।
पहिचन्ते का गाँव न मग में, चौकी न हाट दुकाना ॥३॥
जीते जी ले जीति जनम को, यही गोय यहि मैदाना ।
कहै कबीर सुनो भइ साधो, नहिँ कलि तरन जतन आना॥४
(६)
कायाँ बौरी चलत प्रान काहे रोई ॥ टेक ॥
काया पाय बहुत सुख कीन्हा, नित उठि मलि मलि धोई ।
सो तन छिया छार ह्वै जैहै, नाम न लैहै कोई ॥ १ ॥
कहत प्रान सुनु काया बौरी, मोर तोर संग न होई ।
तोहि अस मित्र बहुत हम त्यागा, संग न लीन्हा कोई ॥२॥
(१) छोटा कुआँ । (२) रस्सी । (३) मतिहीन, अज्ञान । (४) समसान = मुरदा
जलाने का घाट । (५) ऊनी कपड़ा । (६) चार एक ।