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संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 15, कुल 267 में से

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पृष्ठ 15

६ शब्द संग्रह
नीच हाथ हरिचन्द¹ बिकाने, बलि² पाताल धरी ।
कोटि गाय नित पुन्य करत नृग, गिरगिट जोनि परी³॥
पाँडव जिन के आपु सारथी, तिन पर विपति परी ।
दुरजोधन को गर्व घटायो, जदु कुल नास करी⁴ ॥४॥
राहु केतु औ भानु चन्द्रमा, बिधि संजोग परी ।
कहत कबीर सुनो भइ साधो, होनी हो के रही ॥५॥
(१) राजा हरिश्चन्द्र भारी दानी और सत्यवादी थे जिन्हों ने विश्वामित्र
को अपना सब राज पाट यज्ञ की दक्षिणा में दे दिया इस पर मुनिजी ने त० भार सोना दान-प्रतिष्ठा का अपना और निकाला। राजा हरिश्चन्द्र ने उसके
लिये काशी में जाकर अपने को एक डोमड़े के हाथ और अपनी स्त्री और पुत्र
को एक ब्राह्मण के हाथ बेच कर मुनि जी को संतुष्ट किया।
(२) राजा बलि बड़े प्रतापी और दानी थे जिन के द्वारे पर आप भगवान बौना
का भेष धर कर तीन परग पृथ्वी माँगने गये। जब राजा बलि ने संकल्प कर दिया
तब भगवान ने बैराट रूप धारन करके एक परग में स्वर्गादिक और एक में सारी
पृथ्वी नाप ली और कहा कि अब बाकी तीसरा परग देव। राजा ने अपना शरीर भेंट
किया जिसे तीसरे परग से नाप कर भगवान ने उन्हें अमर करके पाताल का
राज्य दिया।
(३) राजा नृग रोज़ एक लाख गऊ दान दिया करते थे। एक बार कोई गऊ
जो पहिले दिन दान हो चुकी थी नई गउवों में आ मिली और राजा ने उसे
अनजान में दूसरे ब्राह्मण को संकल्प कर दिया। इस पर पहिले और दूसरे दिन
के दान पानेवाले ब्राह्मणों में झगड़ा मचा और दोनों राजा के पास न्याय को
गये। दोनों वही गऊ लेने पर हठ करते थे इस लिये राजा की बुद्धि चकराई
और सोच में पड़ कर दोनों की दलोल पर सिर हिला देते। इस पर उन ब्राह्मणों
ने सराप दिया कि तुम गिरगिट की तरह सिर हिलाते हो वही बन जावगे।
इस लिये राजा नृग मरने पर गिरगिट की जोनी पाकर एक अंधे कुए में पड़े
हुए थे जब कृष्णावतार हुआ तब श्रीकृष्ण ने उनको तारा।
(४) पांडवों के रथ पर श्रीकृष्ण महाभारत की लड़ाई में आप सारथी बने और
दुरजोधन का घमंड तोड़ा और कौरवों के कुल का और (परम धाम सिधारने के
पहिले) अपने जदु कुल का नाश किया। पांडवों पर यह विपति पड़ी
थी कि अपना सब राज पाट अपनी स्त्री द्रोपदी सहित कौरवों के हाथ जुए में
हार गये और मुद्दत तक बनोबास में कष्ट उठाया।