संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
पृष्ठ 155, कुल 267 में से
संदर्भ में पढ़ें१४६ शब्द संग्रह
॥ प्रेम ॥
(१)
बिरहिनी मंदिर दियना बार ॥ टेक ॥
बिन बाती बिन तेल जुगति सौँ, बिन दीपक उँजियार ॥१
प्रान पिया मेरे गृह आयो, रचि पचि सेज सँवार ॥ २ ॥
सुखमन सेज परम तत रहिया, पिय निर्गुन निरकार ॥३॥
गावहु री मिलि आनंद मंगल, यारी मिलि के यार ॥४॥
(२)
होली
हौँ तो खेलौँ पिया सँग होरी ॥ १ ॥
दरस परस पतिबरता पिय की, छबि निरखत भइ बौरी ॥२
सोरह कला सँपूरन देखौँ, रबि ससि भे इक ठौरी ॥ ३ ॥
जब तैँ दृष्टि परी अबिनासी, लागो रूप ठगौरी ॥४॥
रसना रटत रहत निस बासर, नैन लगे यहि ठौरी ॥५॥
कह यारी भक्ती करू हरि की, कोई कहै सो कहौ री ॥६॥
॥ भेद ॥
(१)
झूलना
दोउ मूँदि के नैन अंदर देखा, नहिँ चाँद सुरज दिनरातिहैरे ।
रोसन समा बिनुतेल बाती, उस जोति सैँसैलिफानि¹हैरे॥
गोला मारि देखो आदम, कोउ अवर नाहिं सँगसाथिहैरे ।
यारी कहै तहकीक किया, तू मलकउलमौत² की जाति है रे ॥
(२)
झूलना
जमीँ बरखै असमान भींजै, बिन बातिहिँ तेल जलाइये जी।
जहाँ नूर तजल्ली³ बीच है रे, चैरंगी रंग दिखाइये जी ॥
(१) गुन। (२) जमराज । (३) प्रकाश।