संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
DevanagariHindipublished267 पृष्ठ
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जगजीवन साहब १४१
॥ भेद ॥
(१)
जा के लगी अनहद तान हो, निरवान निरगुन नाम को॥१॥
जिकर करके सिखर हेरे, फिकर रारंकार की ॥२॥
जा के लगी अजपा गगन झलकै, जोति देख निसान की॥३
मधु मुरली मधुर बाजै, बाँए किंगरी सारँगी ॥ ४ ॥
दहिने जो घंटा संख बाजै, गैब धुन झनकार की ॥५॥
अकह की यह कथा न्यारी, सीखा नाहीं आन है ॥ ६॥
जगजिवन प्रानहि सोधि के, मिलि रहे सतनाम है ॥ ७ ॥
(२)
गगरिया मोरी चित सेाँ उतरि न जाय ॥ टेक ॥
इक कर करवा¹ एक कर उवहनि², बतियाँ कहैँ अरथाय॥१॥
सास ननद घर दारुन आहै, ता सेाँ जियरा डेराय ॥२॥
जो चित छूटै गागर फूटै, घर मोरि सासु रिसाय ॥३॥
जगजीवन अस भक्ती मारग, कहत अहँ गोहराय ॥