संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)
Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२२ शब्द संग्रह
सुंदर कहत प्रभु, कौन पाप लायो पेट ।
जबही जनम भयो, तबही को खातु है ॥
॥ कामिनी ॥
(१)
कामिनी को तनु मानु कहिये सघन बन,
वहाँ कोऊ जाय सो तौ भूलेही परतु है ।
कुंजर है गति कटि केहरी को भय जा मैं,
बेनी काली नागिनीऊ फन कूँ धरतु है ॥
कुच हैं पहार जहाँ काम चोर रहै तहाँ,
साधि के कटाच्छ बान प्रान कूँ हरतु है ।
सुंदर कहत एक और डर जा मैं अति,
राच्छसी बदन खाँउ खाँउ ही करतु है ॥
(२)
रसिक प्रिया रस मंजरी, और सिंगारहि जान ।
चतुराई करि बहुत बिधि, त्रिषय बनाई आन ॥
बिषय बनाई आन, लगत बिषयिन१ कूँ प्यारी ।
जागे मदन२ प्रचंड, सराह्रै नखसिख नारी ॥
ज्यूँ रोगी मिष्टान खाइ, रोगहि बिस्तारै ।
सुंदर ये गति होइ, रसिक जो रस प्रिया धारै ॥
॥ करम धरम ॥ ,
(१)
मेघ सहै सीत सहै, सीस पर घाम सहै ।
कठिन तपस्या करि, कंद मूल खात है ॥
जोग करै जज्ञ करै, तीरथ रु व्रत करै ।
पुन्य नाना बिधि करै, मन मैं सुहात है ॥
(१) कामी । (२) कामदेव ।