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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 13, कुल 267 में से

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पृष्ठ 13

४ शब्द संग्रह
जब लगि जोवै माता रोवै, बहिन रोवै दस मासा ।
तेरह दिन तक तिरिया रोवै, फेर करै घर बासा ॥३॥
चार गजी अरगजी मँगाया, चढ़ा काठ की घोड़ी ।
चारो कोने आग लगाया, फूँक दियो जस होरी ॥४॥
हाड़ जरै जस लाह कड़ी को, केस जरै जस घासा ।
सोना ऐसी काया जरि गइ, कोई न आयो पासा ॥५॥
घर की तिरिया ढूँढ़न लागी, ढूँढ़ि फिरी चहुँ देसा ।
कहै कबीर सुनो भइ साधो, छोड़ौ जग की आसा ॥६॥
(२)
सुगवा पिँजरवा छोरि करि भागा ॥ टेक ॥
इस पिँजरे में दस दरवाजा,
दसो दरवाजे किवरवा लागा ॥१॥
अँखियन सेती नीर बहन लाग्यो,
अब कस नाहिं तू बोलत अभागा ॥२॥
कहत कबीर सुनो भइ साधो,
उड़ि गे हंस टूटि गयो तागा ॥३॥
(३)
कौने ठगवा नगरिया लूटल हो ॥ टेक ॥
चंदन काठ कै बनल खटोलना, ता पर दुलहिन सूतल हो॥१॥
उठो री सखी मोरी माँग सँवारो, दुलहा मोसे रूसल हो ॥२
आये जमराज पलँग चढ़ि बैठे, नैनन आँसू टूटल हो ॥३॥
चारि जने मिलि खाट उठाइन, चहुँ दिसि धूधू ऊठल हो॥४॥
कहत कबीर सुनो भइ साधो, जग से नाता छूटल हो ॥५॥