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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 12, कुल 267 में से

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कबीर साहिब ३
पानी पवन की गम नहीं, वोहि लोक मँझारा ।
ताही बिच इक रूप है, वोहि ध्यान लगावो ॥ ३॥
जिमीँ असमान उहाँ नहीं, वो अजर कहावै ।
कहै कबीर सोइ साध जन, वा लोक मँझावै ॥ ४॥
(२)
हंसा करो नाम नौकरी ॥ टेक ॥
नाम विदेही निसि दिन सुमिरै, नहिं भूलै छिन घरी ॥ १ ॥
नाम बिदेही जो जन पावै, कभुँ न सुरति बिसरी ॥ २ ॥
ऐसा सबद सतगुरु से पावै, आवा गवन हरी ॥ ३॥
कहै कबीर सुनो भइ साधो, पावै अमर नगरी ॥ ४॥
(३)
जो जन लेहिँ खसम का नाउँ, तिन के सद बलिहारी जाउँ॥१
जो गुरु के निर्मल गुन गावै, सो भाई मेरे मन भावै ॥२॥
जेहिँ घट नाम रह्यो भरपूर, तिन की पग पंकज हम धूर ॥३
जाति जुलाहा मति का धीर, सहज सहज गुन रमै कबीर॥४
॥ चेतावनी ॥
(१)
मन फूला फूला फिरै, जक्त मैं कैसा नाता रे ॥ टेक ॥
माता कहै यह पुत्र हमारा, बहिन कहै बिर¹ मेरा ।
भाई कहै यह भुजा हमारी, नारि कहै नर मेरा ॥ १ ॥
पेट पकरि के माता रोवै, बाँहि पकरि के भाई ।
लपटि झपटि के तिरिया रोवै, हंस अकेला जाई ॥ २ ॥
(१) बीर = भाई ।