सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 110, कुल 267 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 110

केहू पूजा रचि ध्यान लगावैं । देवल देखैं खबरि न पावैं ।
तोरैं पाती जुगति न जानी । इहि भ्रमि रहे भूलि अभिमानी ॥२
तीरथ बरत न पूजै१ आसा । बनखंडि जाहीं रहैं उदासा ।
यूँ तप करि करि देह जलावैं । भरमत डोलैं जनम गँवावैं ॥३
सतगुर मिलैं न संसा जाई । ये बंधन सब देइँ छुड़ाई ।
तब दादू परम गति पावै । सो निज मूरति माहिं लखावै ॥४
॥ कपट भक्ति ॥
हम पाया हम पाया रे भाई ।
भेष बनाइ ऐसी बनि आई ॥ टेक ॥
भीतर का यहु भेद न जानै ।
कहै सुहागनि ज्यूँ मन मानै ॥ १ ॥
अंतर पीव सौं परचा नाहीं ।
भई सुहागनि लोगन माहीं ॥ २ ॥
साँई सुपिनै कबहूँ न आवै ।
कहिया ऐसैं महल बुलावै ॥ ३ ॥
इन बातन मोहिं अचिरज आवै ।
पटम२ कियैं पिव कैसैं पावै ॥ ४ ॥
दादू सुहागनि ऐसैं कोई ।
आपा मेटि राम रत होई ॥ ५ ॥
॥ निंदक ॥
न्यंदक बाबा बीर हमारा । बिनहीं कौड़ै बहै विचारा३॥टेक
कर्म कोटि के कुसमल काटै । काज सँवारै बिनहीं साटै४ ॥१
आपण डूबै और कौं तारै । ऐसा प्रीतम पार उतारै ॥२॥
जुगि जुगि जीवौ न्यंदक मोरा । राम देव तुम करौ निहोरा ३
न्यंदक बपुरा पर-उपगारी। दादू न्यंद्या करै हमारी ॥४॥
(१) पूरन होय । (२) पाखंड । (३) बेचारा बिना पैसे [कौड़े] के काम करता
रहता है [बहै] । (४) बदला, मुआवज़ा ।