सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंत नामदेव : व्यक्तित्व और रचनाएँ ६६
स्थानों से प्राप्त हुई है। कुछ प्रतियाँ जयपुर में भी है। रज्जब की 'सवंगी' में भी
नामदेव के ५० से ऊपर पद संग्रहीत है। और भी सन्त वाणियो के अनेक संग्रहों में
नामदेव के पद है ।' १
विभिन्न हस्तलिखित प्रतियो में कुल २३४ के लगभग हिन्दी के पद नामदेव के
नाम पर मिलते हैं जो पूना विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित 'संत नामदेव की हिन्दी पदा-
वली' नामक संकलन में संग्रहीत किये गये है। इस पदावली के सम्पादक है डॉ० भगीरथ
मिश्र तथा डॉ० राजनारायण मौर्य। इनमें से एक दो पद गोरखनाथ के नाम पर प्रसिद्ध है
एक दो कबीर के नाम पर और एक दो अन्य संतो के नाम पर । इन पदो में से लगभग
१७०-१७५ पद अवश्य ही नामदेव के है क्योकि उन पर स्पष्ट रूप से मराठी की
छाप है।
देखना यह है कि इन रचनाओं में प्रामाणिकता कहाँ तक है। नामदेव के सौ
वर्ष बाद के कबीर की रचना और पाठ निर्णय का अभी पहला प्रयास डॉ० पारसनाथ
तिवारी (प्रयाग) द्वारा हो पाया है तब नामदेव की प्राप्त रचनाओ की प्रामाणिकता का
निर्णय और भी कठिन माना जा सकता है।
'गुरु ग्रन्थ साहब' का संकलन सन् १६०४ में हुआ। नामदेव का रचना सम्बन्धी
यही सबसे प्राचीन ग्रन्थ अब तक माना गया है। पाठ की दृष्टि से गुरु ग्रन्थ साहब का पाठ
सबसे भ्रष्ट है। इसके कुछ पद तो अभी तक कही भी प्राप्त नही हुए है। जैसे अन्य संत
कवियों के नाम पर बहुत-सी रचनाएँ प्रसिद्ध हो गई हैं वैसे नामदेव के नाम पर भी है,
इसमें कोई सन्देह नही। पर पाठशास्त्र के आधार पर लगभग १५० पद निश्चित ही
नामदेव के है। ५० पद ऐसे है जो दूसरो के है, ५० ऐसे हैं जो आधे मराठी के और
आधे हिन्दी के है या सम्पूर्ण मराठी के भ्रष्ट रूप में है और शेष ५० अभी तक संदिग्ध
है। उनमें से कुछ गोरखनाथ, कबीर आदि के नाम से भी प्रसिद्ध हैं।
प्राप्त सामग्री के स्रोत
सिक्खो के धर्म ग्रन्थ 'श्री गुरु ग्रन्थ साहब' मे नामदेव के पद मिलते है। इसके
दो संस्करण देखने में आते हैं। 'श्री गुरु ग्रन्थ साहब' का सकलन ई० स० १६०४
(संवत् १६६१) के लगभग सिक्खो के पाँचवें गुरु अर्जुनदेव ने किया। कहा जाता है कि
यह मूल प्रति करतारपुर मे अब भी सुरक्षित है।
१. संत मत के आदि प्रवर्तक : संत नामदेव, पृ० ११६ ।
'हिन्दुस्तानी' (जनवरी-मार्च १९६२)