सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
पृष्ठ 95, कुल 332 में से
संदर्भ में पढ़ें६८ नामदेव की हिन्दी कविता
में पृ० ४१५ से ४७३ तक 'हिंदुस्तानी पदें' शीर्षक के अन्तर्गत १०२ पद हिन्दी के हैं।
(४) 'श्री नामदेव महाराज यांच्या अभंगाची गाथा' (जनाबाई, नारा, गोंदा,
विठा, परिसा भागवत, गोणाई, राजाई, लाडाई, बाळुबाई तथा निंबाई के अभंगों के
साथ) इसका सम्पादन श्री त्र्यंबक हरी आवटे ने किया है और शक १८३० में यह गाथा
इंदिरा प्रकाशन पूना से प्रकाशित हुई है। इस गाथा में नामदेव के मराठी अभंगों के
अतिरिक्त उनके परिवार तथा समकालीन कुछ अन्य संतों के अभंग भी दिये हैं। गाथा
के आठवें भाग में पृ० ६७८ से ७०० तक (पद संख्या २३२५ से २४२६ तक)
'हिंदुस्तानी पदें' शीर्षक में १०२ हिन्दी पद हैं। रागों के नाम इसमें नहीं हैं।
(५) 'श्री नामदेवरायांची सार्थ गाथा'
इसके संकलन कर्ता, टिप्पणीकार और प्रकाशक हैं श्री प्रल्हाद सीताराम सुबन्ध।
इस गाथा में मूल अभंगों के साथ मराठी अर्थ भी है। अब तक इसके छह भाग प्रकाशित
हो चुके हैं। गाथा के पाँचवें भाग में नामदेव के ६१ हिन्दी पद हैं। ये सभी पद 'श्री
गुरु ग्रंथ साहब' के ही हैं।
नामदेव के मराठी अभंगों का वर्गीकरण इस प्रकार किया जा सकता है—
(१) बाल क्रीड़ा (२) श्री कृष्ण लीला
(३) पंढरी महात्म्य (४) नाम महात्म्य
(५) संत महिमा (६) कलि काल के प्रभाव का वर्णन
(७) निवृत्तिनाथ, सोपानदेव, ज्ञानदेव तथा मुक्ताबाई आदि के समाधि लेने के
प्रसंग के अभंग।
हिंदी की रचनाएँ
अपने जीवन के उत्तरार्ध में उत्तर भारत की यात्रा करते हुए नामदेव ने हिन्दी
में कुछ पदों की रचना की। वास्तविक बात यह है कि संत नामदेव की रचनाओं का
अभी तक हिन्दी संसार को पता ही नहीं था। ग्रन्थ साहब के ६१ पद ही अभी तक
नामदेव की सम्पूर्ण हिन्दी रचना समझी जाती थी। आचार्य विनयमोहन शर्मा ने अपनी
पुस्तक 'हिन्दी को मराठी संतों की देन' में ११ और पद दिये हैं जो ग्रन्थ साहब से भिन्न
हैं। इसके अतिरिक्त संत नामदेव की गाथा में १०३ हिन्दुस्तानी पद हैं जिनमें कुछ ग्रंथ
साहब के हैं और कुछ और दूसरे। किन्तु नामदेव की हिन्दी रचनाएँ इतनी ही नहीं हैं।
इस संदर्भ में डॉ० राजनारायण मौर्य का मत दृष्टव्य है—"मुझे विभिन्न प्रका-
शित और हस्तलिखित प्रतियों से कुल ३०० पद नामदेव के प्राप्त हुए हैं। हस्तलिखित
प्रतियाँ काशी नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी, सेंट्रल पब्लिक लायब्रेरी पटियाला,
बाबा नामदेवजी का गुरुद्वारा घुमान (गुरदासपुर) पंढरपुर, पूना विश्वविद्यालय आदि