सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
पृष्ठ 94, कुल 332 में से
संदर्भ में पढ़ेंसंत नामदेव : व्यक्तित्व और रचनाएँ ६७
रचनाएँ
कहा जाता है कि नामदेव ने शत कोटि अभंग बनाने की प्रतिज्ञा की थी।१
इससे लगता है कि इनकी रचनाएँ बहुत अधिक होगी। इनके 'शत कोटि' का अर्थ प्रचुर
मात्रा मे लेना ही समीचीन है। आज नामदेव के अभंगो के पाँच छपे हुए गाथा उपलब्ध
है जिनमें लगभग ढाई हजार अभंग इनके नाम पर मिलते है परन्तु नामदेव के नाम से
प्रचलित सभी अभंग नामदेव के नही है। छपे हुए गाथाओ में ऐसे भी पद पाये जाते है
• जिनमे कबीर और कमाल का उल्लेख है जो नामदेव के बाद के है। जैसे 'कबीरा धूम
मचाई' आदि।
इन पाँच गाथाओ में जो ढाई हजार के लगभग अभंग मिलते हैं उनमें से छः
सात सौ अभङ्ग ही मूलतः नामदेव के होगे, शेष सभी प्रक्षिप्त हे। डॉ० तुलपुले के अनु-
सार नामदेव की गाथा मे विष्णुदास नामा के अभङ्गो की प्रचुर मात्रा में जो खिचड़ी
हुई है उसमें से नामदेव के अभङ्ग अलग करने की कोई अचूक तरकीब नही है।२ डॉ०
भगीरथ मिश्र भी डॉ० तुलपुले के मत का समर्थन करते है।३
मराठी गाथा की प्रतियाँ
(१) नामदेवाची आणि त्यांच्या कुटुम्बातील व समकालीन साधूंच्या अभंगांची
गाथा : इसके संकलन-कर्ता हैं श्री तुकाराम तात्या पडत। यह गाथा 'तत्त्व विवेचक प्रेस'
बम्बई से सन् १८६० ई० में प्रकाशित हुई। जैसा कि शीर्षक से ही विदित होता है
इसमें नामदेव, उनके परिवार और तत्कालीन अन्य संतों के मराठी अभङ्ग हैं। इसके
पृ० ६४५ से ६७७ तक 'हिन्दुस्तानी भाषेत अभङ्ग' शीर्षक के अन्तर्गत नामदेव के १०६
हिन्दी पद (पद सख्या २३४५ से २४५० तक) है।
(२) 'नामदेवाची गाथा' (आवृत्ति दूसरी) रा० श्री० गोधलेकर जगद्धितेच्छु
छापाखाना, पुणे सन् १८६६.
(३) 'श्री नामदेवाचा गाथा'। इसके संकलन कर्ता ह० भ० प० विष्णु नरसिंह
जोग है। यह गाथा शक १८४७ में पूना के चित्रशाला प्रेस से प्रकाशित हुई। नामदेव
के नाम से प्राप्त होने वाले सभी मराठी पदों का यह अच्छा सग्रह है। इसके चौथे भाग
१. शत कोटी तुझे करीन अभङ्ग। म्हणे पांडुरंग ऐक नाम्या॥
श्री नामदेवाचा गाथा, पृ० ३१७, अभङ्ग १६२।
२. पाँच संत कवी : डॉ० शं० गो० तुलपुले, पृ० १३८-१३६।
३. संत नामदेव की हिंदी पदावली
—डॉ० भगीरथ मिश्र, पृ० ४०।
७