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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 88, कुल 332 में से

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पृष्ठ 88

संत नामदेव : व्यक्तित्व और रचनाएँ ६१
'A Shrine is dedicated to his memory and is still in use at
Dhoman in Gurdaspur district.'¹
'His samadhi (tomb) was built in the same Mandir at Dhoman
by his disciples. The existing temple at Dhoman known as the
Mandir of Shri Swami Namdev is one of the most beautiful
Shrines in the punjab.'²
नरसी की समाधि
नरसी मराठवाड़ा के परभणी जिले में है। गाँव से दो फर्लाङ्ग की दूरी पर
कपाधू नदी के किनारे नामदेव की समाधि है। वहाँ एक छोटा-सा मंदिर भी है।
फाल्गुन वद्य ११ को वहाँ मेला लगता है। स्वयं श्री कोरटकर को अपनी जानकारी
के विश्वसनीय होने में संदेह है।³
पंढरपुर की समाधि
नामदेव के शिष्य परिसा भागवत के एक अभंग४ द्वारा सन् १३५० ई० में
पंढरपुर में ही नामदेव की समाधि लेने की बात पुष्ट होती है।
प्रिन्सिपल दांडेकर के अनुसार नामदेव की समाधि पंढरपुर में महाद्वार के पास
है। उन्होंने आषाढ वद्य १३ शके १२७२ को समाधि ली। नामदेव ने अपने एक अभंग
में अपने आपको सीढ़ी का पत्थर कहा है। इस सीढ़ी के पत्थर को संतों के चरणों का
स्पर्श होने से उनका उद्धार होगा।५ श्री दांडेकर का विचार है कि नामदेव ने सपरि-
वार समाधि ली। उनकी पुत्र वधू लाडाई गर्भवती होने के कारण मायके गई थी। वह
अकेली पीछे रह गई।६

  1. An outline of the Religious Literature of India : by J. N.
    Farquhar p. 299
  2. Shri Swami Namdev : by Bhagat Ram p. 11,
    ३. नामदेवाची नरसी—केशवराव कोरटकर —भ० इ० सं० मंडल त्रैमासिक पत्रिका
    शके १८४८ अंक १-४।
    ४. आषाढ शुक्ल एकादशी। नामा विनवी विठुलासी।
    आज्ञा व्हावी हो मजसी। समाधि विश्रांति जागी॥
    ५. नामा म्हणे आम्ही पायरीचे चिरे। संत पाय हिरे देनी वरी॥
    श्री नामदेवाचा गाथा, पृ० ३८१ अभङ्ग ५३३।
    ६. महाराष्ट्रीय संत : वाङ्मय व जीवन, शं० वा० दांडेकर।