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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 87, कुल 332 में से

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पृष्ठ 87

६० नामदेव की हिन्दी कविता
नामदेव भ्रमणशील व्यक्ति थे ।¹
'तुम्हारे दर्शन की उत्कंठा लगी हुई है चित्त एक स्थान पर रहता नही ।'²
नामदेव ने बद्रिकाश्रम की यात्रा भी की थी ।³
"At the age of fifty he (Namdev) became indifferent to the
world He travelled through the four quarters of India."⁴
"He left home and started on his second pilgrimage which
extended to the holy shrines in Northern India and ultimately
to the Punjab which was destined to be his resting place for
ever."⁵
नामदेव की समाधि
सर्व साधारण मनुष्य की तरह उम्र पूरी होने पर स्वाभाविक रीति से नामदेव
की मृत्यु हुई ऐसा किसी ने नही कहा । नामदेव-भक्तों का विश्वास है कि जिस प्रकार
संत ज्ञानेश्वर ने समाधि ली उसी प्रकार नामदेव भी समाधिस्थ हुए ।
पंजाब में नामदेव की समाधि के बारे में एक विचित्र कथा प्रचलित है—
नामदेव अपना भौतिक शरीर घुमान मे छोड़कर सुरत-स्वरूप पंढरपुर चले गये और
वहाँ समाधिस्थ हुए । घुमान के मंदिर में उनके शरीर पर चादर डाल दी गयी थी ।
उन्होंने अपने शिष्यों से कहा कि यह भेद किसी को ज्ञात न हो । तीन दिन के पश्चात्
शिष्यों ने देखा कि वे पहले ही काल-वश हो चुके हैं । उन्होंने उनकी अंत्य क्रिया की
और समाधि भी बनवाई ।⁶
तीन स्थानों पर नामदेव की समाधियाँ बताई जाती है । उनके बारे में विद्वानों
के मत इस प्रकार हैं—
घुमान की समाधि
'घुमान में नामदेव की समाधि का भव्य मंदिर है ।'⁷
१. परिचयी साहित्य : डॉ० त्रिलोकीनारायण दीक्षित पृ० ८६
२. भेटीची आवडी उत्कंठित चित्त । न राहे निवात एके ठायी ।
सकल संत गाथा, अभङ्ग १५३६
3. Selections from Hindi Literature p. 112
—by Lala Sitaram
4 Shri Swami Nemdev : by Bansidhar Shastri p. 124.
5. Shri Swami Namdev : by Bhagat Ram p. 14-16.
६. जनम साखी
७. श्री नामदेव चरित्र (पुनर्मुद्रण) प्रस्तावना रं० कृ० भाळुंकर पृ० १०१ ।