सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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उन्होंने अपने हाथ से विट्ठल को दूध पिलाया था और नैवेद्य भी खिलाया था। उनका
मन गृहस्थी में बिलकुल नहीं लगता था।
क्या बाल भक्त नामदेव डाकू थे ?
नामदेव की सांप्रदायिक गाथा में कई अभंग प्रक्षिप्त हैं। इनमें से छप्पन चरणो
के एक अभंग 'नरसी ब्राह्मणीचा दामा शेट शिंपी'१ के कारण नामदेव के विषय में
गलत-फहमी फैली हुई है।
इस अभंग को हम ती भागों में विभाजित कर सकते हैं—
(१) जन्म और बाल्य काल चरण १ से १६।
(२) युवावस्था चरण १७ से ३०।
दुर्भाग्य से नामदेव कुसंगति में पड़ गये और डकैती करने लगे।२
(३) उपरति चरण ३१ से ५६।
नामदेव को अपनी करतूत पर ग्लानि हुई और वे पंढरपुर चले गये।
नामदेव के जीवन की उपर्युक्त घटना के विषय में नामदेव-साहित्य के अध्येता
अपने मत इस प्रकार प्रस्तुत करते हैं—
श्री भावे यथा श्री आजगांवकर के अनुसार यह अभंग प्रामाणिक है। श्री
भावे ने नामदेव की डकैती को पुष्टि देने वाले नामदेव की पत्नी राजाई के नाम से
प्रसिद्ध दो अभङ्ग उद्धृत किये है।३ श्री आजगांवकर ने नामदेव के डाकू बनने की
घटना का सविस्तार वर्णन किया है।४
डॉ० रानडे ने नामदेव के डाकू होने के बारे में संदेह प्रदर्शित किया है।५
श्री पाटस्कर के अनुसार छप्पन चरणों का यह अभङ्ग रचने वाला कोई अन्य
चरित्रकार है, नामदेव नही।६
श्री रं० कृ० भालुंकर७ तथा डॉ० शं० गो० तुलपुले८ के अनुसार यह अभङ्ग
१. नरसी ब्राह्मणीचा दामा शेट शिंपी।
केशिराज रूपी मग्न असे। अ० १२४५
२. प्राक्तनाचे योगे भरलासे ओहटा। पाडितसे वाटा चौरा संगे। —वही
३. महाराष्ट्र सारस्वत (पुरवणी सह) शके १८७६, पृ० १६५-१६८।
४. श्री नामदेव महाराज आणि त्यांचे समकालीन संत, पृ० २१-२४।
५. संत वचनामृत (प्रस्तावना) पृ० १६।
६. बाल भक्त नामदेव दरोडेखोर होते काय ? पृ० २०।
७. श्री नामदेव चरित्र (पुनर्मुद्रण) प्रस्तावना, पृ० ५७।
८. पाँच संत कवी (१९६२ का संस्करण) पृ० १३६।