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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 81, कुल 332 में से

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पृष्ठ 81

८४ नामदेव की हिन्दी कविता
गोणाई कहती है कि 'नव मास तक मैने गर्भ का बोझ ढोया ।'१
जाति तथा व्यवसाय
प्राचीन वर्ण-व्यवस्था के अन्तर्गत हर एक व्यक्ति का व्यवसाय उसकी जाति पर
ही निर्भर होता था। अतः नामदेव अपना पैतृक व्यवसाय अर्थात् 'शिंपी काम' (दर्जी
का पेशा) करते थे। उनके जाति तथा व्यवसाय से 'शिंपी' (दर्जी) होने का उल्लेख
उनके गाथा के अभंगों मे पाया जाता है—
'दर्जी के कुल मे मेरा जन्म हुआ ।'२
गोणाई को आपत्ति है कि 'नामदेव अपने पैतृक व्यवसाय की ओर ध्यान
नही देता ।'३
'मेरा मन गज है और जिह्वा कैंची। दोनो की सहायता से मैं यम का बन्धन
काटता हूँ। मैं कपड़ा रंगने और सिलने का काम करता हूँ ।'४
बाल्य काल
नामदेव के बाल्यकाल के संबंध में कई चमत्कारपूर्ण तथा असाधारण आख्यायिकाएं
प्रचलित हैं। जनार्दन रामचंद्र५ उन्हें उद्धव का अवतार मानते हैं। गार्सा द तासी६
उनको विष्णु का तथा नरहरि मालू७ सनत्कुमार का अवतार मानते हैं। एक अलौकिक
घटना नामदेव के चरित्र के साथ जुड़ी हुई है। वह यह कि आठ वर्ष की आयु में
१. नव मास वरी म्या वाहिलासी ऊदरी ।
—गाथा पंचक, अ० १२६५ ।
२. शिंपियाचे कुली जन्म मज झाला ।
—अ० १२४३ ।
३. शिवण्या टिपण्या त्वां घातले पाणी ।
न पहासी परतोनि घराकडे ॥
—सकल संत गाथा, अ० १२६६ ।
४. मन मेरो गजु जिह्वा मेरी काती ।
मपि मपि काटऊ जम की फाँसी ।
—संत नामदेव की हिंदी पदावली, पृ० १८ ।
५. कवि चरित्र, पृ० १५२ ।
६. हिंदुई साहित्य का इतिहास, पृ० १३१ ।
७. भक्त कथामृत (मराठी) नरहरि मालू