सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
पृष्ठ 80, कुल 332 में से
संदर्भ में पढ़ेंसंत नामदेव : व्यक्तित्व और रचनाएं ८३
(११) येसाई : गोदा की पत्नी
(१२) महादा : नामदेव का चौथा बेटा
(१३) साखराई : महादा की पत्नी
(१४) लिंबाई : नामदेव की बेटी
(१५) जनाबाई : नामदेव के घर की दासी ।
जन्म
नामदेव के जन्म के सम्बन्ध में बहुत सी अलौकिक कथाएं महाराष्ट्र तथा उत्तर
भारत में प्रचलित हैं । महाराष्ट्रीय संतों के चरित्र-लेखक महीपति के अनुसार नामदेव
की उत्पत्ति सीप से हुई ।¹
प्रियादास के अनुसार नामदेव एक विधवा के गर्भ से उत्पन्न हुए ।²
नामदेव की गाथा का एक प्रसिद्ध अभङ्ग भी सत्य का विपर्यास करने वाला है ।
'परमात्मा ने शुक्ति (सीप) रूपी कमल दिया और कहा कि नौवां मास प्रारम्भ होने पर
वह विकसित होगा ।'³
क्या नामदेव अयोनिज थे ?
महीपति ने नामदेव को जो अयोनिज बताया है वह केवल उनकी महत्ता बढ़ाने
के लिए । प्रियादास का कथन तो आज के वैज्ञानिक युग में अवैज्ञानिक-सा लगता है ।
यह भी भक्त और भगवान् की महिमा दिखाने के लिए कहा गया है ।
वास्तव में नामदेव अयोनि-संभव नहीं थे । स्वाभाविक रीति से ही अपनी माता
के उदर से उनका जन्म हुआ । स्वयं वे कहते हैं—
'मेरी माता ने मुझे जन्म दिया ।'⁴
छीपे के घर मेरा जन्म हुआ ।'५
१. भक्त विजय (निर्णयसागर प्रति, १९५०) अध्याय चौथा ।
२. भक्तमाल (सटीक) : प्रियादास प्रणीत, पृ० ३२५ ।
३. देवाने दिधले शुक्ति का कमल । म्हणे उकनेल नववे मासी ॥ अ० १२४५ ।
४. प्रसवली माता मज मलमूत्री ।
—गाथा पंचक, अ० १२५४ ।
५. छीपे के घर जनमु दैला ।
—पंजाबातील नामदेव, पृ० ८६ ।