सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 73, कुल 332 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 73

७६ नामदेव की हिन्दी कविता
नामदेव का समाधि शक विकृत नाम संवत्सर शके १२७२, आषाढ वद्य १३,
शनिवार निश्चित किया गया है। अतः शके ११९२ को नामदेव का जन्म काल तथा
शके १२७२ को उनका समाधि काल मानना ‘ऐंशी वर्षे आयुष्य पत्रिका प्रमाण’ इस
चरण के साथ पूर्णतया सुसंगत है।
जन्म स्थान
सबसे जटिल तथा महत्त्वपूर्ण प्रश्न नामदेव के जन्म स्थान का है। जन्मकाल
की ही तरह उनके जन्म स्थान के सम्बन्ध में भी अनेक मत प्रचलित हैं। इस विषय
में अभी तक कोई एक निश्चित धारणा नहीं बनाई जा सकी है।
नामदेव के जन्म स्थान के सम्बन्ध में दो मत प्रस्तुत किये जाते हैं—
(१) नामदेव का जन्म स्थान पंढरपुर है।
(२) नामदेव का मूल गाँव नरसी है और वहीं उनका जन्म हुआ।
नामदेव का जन्म पंढरपुर में होने के पक्ष में निम्नलिखित प्रमाण उपलब्ध हैं—
जनाबाई अपने एक अभंग में कहती है—‘नामदेव के जन्म के पूर्व उसके माता-
पिता पंढरपुर में रहते थे। गोणाई ने पुत्र प्राप्ति के लिए मनौती की। उसको जो बेटा
हुआ वही नामदेव है।’¹
सन्त एकनाथ ने नामदेव-जन्म की इसी कथा को दुहराया है।²
हिन्दी में नामदेव का सर्वप्रथम चरित्र लिखने वाले परिचयीकार अनन्तदास
हैं। उन्होंने ‘नामदेव की परचै’ में नामदेव का जन्मस्थान पंढरपुर बताया है।³
डॉ० भागीरथ मिश्र स्पष्टतः लिखते हैं कि ‘नामदेव का जन्म कराड के नरसी
१. गोणाईने नवस केला । देवा पुत्र देई भला ॥
शुद्ध देखोनिया भाव । पोटी आले नामदेव ।
—आपटे प्रत, अभंग १३६
२ द्वारकेहुनि विठु पंढरीये आला । नामयाचा पूर्वज दामाशेट्टी वहिला ।
—आपटे प्रत, अभंग १५५७
३ पंढरपुर जहाँ नगर सहन भोग कराही ।
नामदेव को पिता बसे बैरोजा माही ॥
जाको पुत्र पुनीत नामदेव सब विधि पूरो ।
सकल सिरोमनि सन्त विप्र सूर निभे सूरो ॥
—नामदेव की परिचयी ( हस्तलिखित प्रति )
जयकर ग्रन्थालय, पूना विश्वविद्यालय, पूना।