सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंत नामदेव : व्यक्तित्व और रचनाएँ ७१
देव का काल खींचकर आगे बढ़ा दिया है। उन्होंने एक और तर्क दिया है। वह है
संत नामदेव का रामानंद का शिष्य होना । वे रामानन्द का जन्म सन् १४२० और
३० ई० के बीच तथा कबीर का सन् १४५० और ६० के बीच मानते हैं।
डॉ० मोहनसिंह के इन दोनों तर्कों में कोई तथ्य नही है। इसका तो कही
उल्लेख भी नही है कि रामानन्द नामदेव के गुरु थे। मराठी और हिंदी साहित्य में भी
यह प्रचलित है कि संत ज्ञानेश्वर के पिता के गुरु रामानन्द थे । किन्तु श्री भावे¹ के
मत से उनके गुरु श्रीपाद स्वामी थे । रामानन्द का काल आज भी निश्चित नही है पर
इतना अवश्य निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि वे संत नामदेव के गुरु नही हो
सकते ।
आचार्य विनयमोहन शर्मा को इस घटना के घटित होने में ही संदेह है। यदि
इस पर विश्वास करें तो यह पद प्रक्षिप्त मानना पड़ेगा । उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अपना
मत इस प्रकार व्यक्त किया है— 'यदि किसी सुलतान के दरबार में यह घटना घटी
होती तो वह अवश्य ही लेखबद्ध हुई होती । हो सकता है यह घटनावाला 'पद' भग-
वान विठ्ठल के नाम का चमत्कार प्रदर्शित करने के लिए रचा गया हो । उपर्युक्त
कारणों से नामदेव का फीरोजशाह वहमनी के समय रहना सिद्ध नही होता ।'²
इस घटना के आधार पर नामदेव के काल को सौ वर्ष आगे ले जाना किसी
तरह तर्क-संगत नही कहा जा सकता ।
मेकालिफ का मत
मेकालिफ ने नामदेव के असंग 'मार्के जन्मपत्र बाबाजी ब्राह्मणों' का आधार
लेकर शके ११९२ (तदनुसार स० १२७० ई०) को नामदेव का जन्म-शक माना है—
‘Namdeo was born on Sunday, the 11th day of the light half of
the month of Kartik in the Shaka year 1192 i, e. 1270 A. D.’³
जनम साखी
सं० १८६८ ई० में बाबा पूरणदास की लिखी 'जनम साखी श्री स्वामी नाम-
देव जी की, में वामदेव की बाल विधवा कन्या लक्षावती की कथा आई है। इस कथा में
कहा गया है कि अपनी १२ वर्ष की अवस्था में ही पुत्र प्राप्ति की अभिलाषा से उसके
पेट से जो बालक पैदा हुआ वही नामदेव है । इस बालक का जन्म रविवार फाल्गुन
१. महाराष्ट्र सारस्वतः वि० ल० भावे, पृ० १३३ ।
२. हिंदी को मराठी संतों की देन पृ० ३०
3. Sikh Religion Vol. VI : Mcauliffe