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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 63, कुल 332 में से

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पृष्ठ 63

६६ नामदेव की हिन्दी कविता
भक्तमाला राम रसिकावली में नामदेव की वे ही सब कथायें हैं जो प्रियादास
की 'भक्तमाल' की टीका में हैं। इसमें कोई नवीनता नहीं है।
ज्ञानेश्वर और नामदेव का समकालीनत्वः
ज्ञानेश्वर और नामदेव के समकालीनत्व के संबंध में निम्नलिखित मत प्रस्तुत
किये जाते हैं :-
(१) श्री० भारद्वाज तथा श्री भिंगारकर के परस्परविरोधी मत
'ज्ञानेश्वरी' तथा 'अमृतानुभव' के रचयिता ज्ञानदेव तथा अभंगो के रचयिता
ज्ञानदेव दो भिन्न व्यक्ति हैं तथा उनमें डेढ़ सौ, दो सौ साल का अंतर है। अपने इस मत
का श्री शिवरामबुवा एकनाथ भारदे उर्फ 'भारद्वाज' ने बड़े अभिनिवेश के साथ प्रति-
पादन किया ।¹ उन्होंने 'माझें जन्म पत्र बाबाजी ब्राह्मणें' अभंग के 'अधिक ब्याण्णव
गणित अकरा शतें' के स्थान पर 'अधिक नऊ गणित तेरा शते' ऐसा एक नया काल्प-
निक पाठ सुझाकर नामदेव का जन्मकाल शक १३०६ निश्चित किया । मराठी संत
साहित्य के अनेक अध्येताओ ने उनकी इस स्थापना का खण्डन किया । इनमें प्रमुख हैं
श्री धोपतोबुवा भिंगारकर² तथा पं० पांडुरंग शर्मा ।³ इन दोनो के अनुसार एक ही
ज्ञानेश्वर ने ज्ञानेश्वरी तथा स्फुट अभंगो की रचना की और संत नामदेव संत ज्ञानेश्वर
के समकालीन थे ।
१. 'ज्ञानदेव व नामदेव समकालीन होते काय ?': 'भारद्वाज'—'सुधारक' (मराठी पत्र)
( ५-१२-१८६८)
२. श्री महासाधु ज्ञानेश्वर महाराज याचा काल निर्णय व संक्षिप्त चरित्र : धोपतोबुवा
भिंगारकर, पृ० ३-४ ।
३. (अ) 'नामदेवाचा निर्णय' : श्री० पांडुरंग शर्मा
—भारत इतिहास संशोधक मण्डल (त्रैमासिक पत्रिका) वर्ष ५ वां, अंक १-४,
शक १८४६, पृ० ३०-५८ ।
(ब) 'वारकऱ्याच्या वसाहती'
—भा० इ० सं० मंडल त्रैमासिक पत्रिका, पृ० ३-१८ । वर्षं छठा, अंक
१-४, शक १८४७ ।
(क) ज्ञानदेव व नामदेव समकालीन होते काय ?
—'चित्रमयजगत्' (मराठी पत्रिका) पुणे, अगस्त १६२२ ।
(ख) Historical Position of Namdev P. 335-41
—Annals of the B. O. R. I. (Poona) 1926-27.