सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
पृष्ठ 62, कुल 332 में से
संदर्भ में पढ़ेंसंत नामदेव : व्यक्तित्व और रचनाएँ ६५
इस अभंग में आये 'प्रभव' तथा 'प्रमोद' संवत्सरो के पाठ के संबंध मे काफी
ऊहापोह हुआ है । यद्यपि इस अभंग के नामदेव-कृत होने मे शंका की जाती है फिर
भी, यह भी सही है कि नामदेव की जन्म-तिथि निश्चित करने के लिये अन्य कोई
प्रमाण साधन के रूप में प्राप्त नही होता ।
डॉ० हे० वि० इनामदार के अनुसार 'इस अभंग में शालिवाहन शक ११९२ में
'प्रभव' संवत्सर का जो निर्देश किया गया है वह गलत है । उसके स्थान पर 'प्रमोद'
संवत्सर का उल्लेख आवश्यक था ।'१
श्री० शं० पु० जोशी ने शके ११८५ को नामदेव का जन्म शक मान कर एक
जन्म कुंडली दी है । यह कुंडली श्री० प्र० रा० मुंगे द्वारा तैयार की गई है । श्री जोशी
लिखते है—'उपर्युक्त अभंग में शक और संवत्सर का परस्पर मेल नही बैठता । शक
११८५ में 'प्रमोद' संवत्सर आता है । अतः कातिक शुक्ल एकादशी शक ११८५ को
नामदेव का जन्म काल मानकर उनकी कुंडली तैयार की गई है ।'२
अनंतदास कृत 'नामदेव की परिचयी':
'परिचयी' ग्रंथो से संतो के जीवन पर नया प्रकाश पड़ता है । इस दृष्टि से
अनंतदास कृत 'नामदेव की परिचयी' महत्वपूर्ण है । इस परिचयी का रचनाकाल सं०
१६४५ वि० है । बड़े खेद की बात है कि अनंतदास ने जहाँ नामदेव की मननशीलता,
उनका आध्यात्मिक उत्कर्ष और सहनशीलता के विषय मे इतना लिखा वहाँ उनकी
जन्मतिथि के विषय में कुछ भी नही कहा । अतः नामदेव की जन्मतिथि निश्चित करने
में यह परिचयी विशेष सहायता नहीं करती क्योकि इसमें नामदेव के जन्म और जन्म
काल का बिलकुल उल्लेख नही मिलता ।
नाभादास कृत 'भक्तमाल':
'भक्तमाल' के रचना-काल में पूर्ण मतैक्य नहीं है । डॉ० दीनदयालु गुप्त ने
इसका रचना काल संवत् १६८० वि० माना है ।३ नाभादास ने एक छप्पय में नामदेव
विषयक पाँच आश्चर्यजनक घटनाओं का वर्णन किया है परंतु उसमें नामदेव के जन्म
शक का कही उल्लेख नही है ।
प्रियादास ने भी 'भक्तमाल' की अपनी टीका में नामदेव का जन्मकाल नही
दिया है ।
१. संत नामदेवः डॉ० हे० वि० इनामदार पृ० ३०
२. पंजाबातील नामदेव पृ० १५
३. अष्टछाप और वल्लभ संप्रदाय ( पूर्वार्द्ध ) पृ० १०६ ।
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