सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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केवल इतना ही है कि मराठी अभंग उनके जीवन की किशोरावस्था में रचे गये, जिनमें
भक्ति की विह्वलता और वर्णनात्मकता है। हिन्दी पद जीवन के उत्तरकाल में रचे गये
जिनमें अनुभूति की परिपक्वता है।
जन्म काल
नामदेव का 'अयोनि-संभव होना—डॉ० इनामदार¹ 'भक्तमाल' में वर्णित कथा
तथा विष्णुदास नामाकृत 'आदि' प्रकरण के अभङ्ग में आई हुई पंक्तियों के आधार पर
नामदेव को 'अयोनि-संभव' मानने के पक्ष में नहीं है। इस संबंध में वे स्वर्गीय म० गो०
घारटक्के² के मत के समर्थक हैं तथा सीपी शब्द का अर्थ शुक्तिका मानकर नामदेव को
अयोनिज मानने वालों का खण्डन करते हैं। नामदेव गाथा, जनाबाई तथा विठाके अभंगों
के आधार पर भी उन्होंने नामदेव के नैसर्गिक जन्म की पुष्टि की है। इस प्रवाद के
पीछे अयोनिज व्यक्ति को अन्य व्यक्तियों से श्रेष्ठ घोषित करने की भावना को भी वे
कोई महत्त्व नहीं देते और ईश्वर-प्राप्ति से पूर्व सभी को अपूर्ण और अशुद्ध मानकर
इसका प्रतिवाद करते हैं। डॉ० भगीरथ मिश्र³ भी महीपति के कथन को केवल महत्ता-
प्रदर्शन के लिए किया गया तथा प्रियादास के कथन को अवैज्ञानिक मानते हैं।
नामदेव-चरित्र के प्राचीन स्रोत-गाथा—
नामदेव का जन्म काल निश्चित करने के लिए आज जो भी साधन उपलब्ध हैं
उनमें नामदेव के अभंगों की गाथा प्रमुख है। इस गाथा का 'नामदेव चरित्र' शीर्षक
प्रकरण नामदेव-विरचित होने में संदेह किया जाता है !⁴
'नामदेव-चरित्र' के निम्नलिखित अभंग के अनुसार नामदेव का जन्म रविवार
कार्तिक शुक्ल एकादशी शक ११९२ (तद्नुसार २६ अक्टूबर सन् १२७० ई०) को
हुआ था—
माझे जन्म पत्र बाबाजी ब्राह्मणे। लिहिले त्याची खूण सांगेन ऐका ॥
अधिक व्याण्णव गणित अकरा शतें। उगवता आदित्य रोहिणीसी ॥
शुक्ल एकादशी कार्तिकी रविवार। प्रभव संवत्सर शालिवाहन शके ॥
आवटे प्रत, अभंग १२५४
१. संत नामदेव : डॉ. हे. वि. इनामदार, पृ० १५।
२. विष्णुदास नामा कृत नामदेवांची 'आदि' 'लोकशिक्षण' (मराठी पत्रिका) मई
१९४०, पृ० ८१५।
३. संत नामदेव की हिन्दी पदावली, पृ० ३३।
४. श्री नामदेव महाराज आणि त्यांचे समकालीन संत - ज. र. आजगांवकर, पृ० २।