सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५६ नामदेव की हिन्दी कविता
महाराष्ट्रीय सत नामदेव हे अथवा कोई अन्य ? आचार्य परशुराम चतुर्वेदी ने अपनी
"उत्तरी भारत की सत परपरा" में कई नामदेवो का उल्लेख किया है। ध्यान देने की
बात यह है कि "नामदेव" नाम के चार या पाँच तो महाराष्ट्रीय संत थे। उत्तरी
भारत में भी दो से अधिक नामदेव नामधारी संतो का किसी न किसी समय वर्तमान
होना कहा गया है। अत संत नामदेव—जिनके पद "गुरु ग्रंथ साहिब" में संग्रहीत है—
के विषय में निश्चित रूप से कुछ कहना अथवा उनकी जीवनी तथा रचनाओ का
प्रामाणिक परिचय देना सदेह से रहित नही कहा जा सकता ।
यहाँ उन संतो और कवियो का परिचय देना आवश्यक है जो नामदेव के नाम
से प्रसिद्ध हैं।
(१) ज्ञानेश्वर के समकालीन नामदेव
इनका उल्लेख निवृत्तिनाथ के अभंगो में आता है। अन्य नामदेवो की अपेक्षा
इनकी रचनाएँ बहुत ही सरस एवं भावुकतापूर्ण है। कुछ अभंगो में ये अपने नाम का
उल्लेख केवल "नामा" शब्द से करते है। कुछ अभंगो में "केशवाचा नामा" (केशव
का नामा) तथा विष्णुदास नामा आदि मुद्राओं द्वारा ये अपना परिचय देते हैं।
(२) विष्णुदास नामा
नामदेव के मराठी अभंगो तथा हिंदी पदो में विष्णुदास नामा का नाम बार-
बार आया है। उनका काल सन् १५८०-१६३३ ई० के मध्य का है। उनकी प्रामाणिक
रचना "शुकाख्यान" है जिसकी अतिम ओवी में उसका रचनाकाल इस प्रकार दिया
है। "शालिवाहन शक के मन्मथनाम संवत्सर को पौष्य अमावस्या सोमवार को, ग्रथ
पूर्ण हुआ, श्रोता गण सावधान होकर उसका श्रवण करें।"१ यह काल शालिवाहन शक
का १५१७ है और नामदेव का प्रयाण काल शक १२७२ है। दोनों के काल में लगभग
ढाई सौ वर्ष का अंतर है। अत विष्णुदास नामा सत नामदेव से निश्चित ही भिन्न हैं।
श्रीमती सरोजिनी शेंडे ने अपने शोध प्रबन्ध में २ विष्णुदास नामा सबंधी सभी
१. उत्तरी भारत की सत परपरा पृ० १०५
१. मन्मथ नाम सवत्सरे पौष्य मासीं ।
सोमवार अमावास्येच्या दिवशीं ।
पूर्णता आली प्रयासी ।
श्रोते सावकासो परिसोजे ।
—सकल संत गाथा, अभंग २२५३
२. विष्णुदास नाम्याच्या महाभारताचा विवेचनात्मक अभ्यास
— (अप्रकाशित प्रबंध) मुंबई विद्यापीठ ग्रंथालय, १९६०