सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
पृष्ठ 52, कुल 332 में से
संदर्भ में पढ़ेंसंत नामदेव : व्यक्तित्व और रचनाएँ
संतो के वैयक्तिक जीवन और उनकी काव्य रचना का घनिष्ठ सम्बन्ध है ।
उनके लिए परमार्थ साधना ही जीवन का आदर्श था और काव्य रचना इस साधना
का आविष्कार । उनका साहित्य व्यक्तिनिष्ठ है अथवा विषयनिष्ठ, इस विषय पर वाद-
विवाद की गुंजाइश ही नही है क्योकि संतों के भाव-जीवन तथा उनकी काव्य सृष्टि में
अधिकांश में एकरूपता है । इसीलिए उनके भाव जगत् और इहलोक के चरित्र में
अन्तर नही खोजा जा सकता । फिर भी उनके जीवन कार्य तथा उनके काव्य का
अन्वयार्थ लगाने के पहले उनका जीवन परिचय प्राप्त कर लेना आवश्यक हो जाता है ।
नामदेव ने अपनी आत्मकथा भी लिखी है । उनके आत्म-चरित्र-परक अभंगों
की सहायता से हम उनके जीवन की प्रमुख घटनाओं का ढाँचा खड़ा कर सकते हैं
यद्यपि इसमें भी अनेक कठिनाइयाँ हैं । इन आत्म-चरित्र-परक अभंगों में कई प्रक्षिप्त हैं
तथा बहुत से अभंगों में पाठभेद भी पाया जाता है । इन अभंगों की प्रामाणिकता में
भी सन्देह है क्योकि स्वयं नामदेव के हाथ की लिखी अधिकृत गाथा अभी तक किसी
को भी प्राप्त नही हुई है ।
नामदेव के समकालीन संतो ने उनका जो परिचय दिया है उसको कहाँ तक
ग्राह्य अथवा अग्राह्य समझा जाय यह भी एक समस्या है । डॉ० भांडारकर, पं० पांडुरंग
शर्मा, श्री भिंगारकर बुवा, श्री आजगावकर, प्रो० प्रियोलकर, डॉ० वि० भि० कोलते,
प्राचार्य दांडेकर आदि अनुसंधान-कर्ताओं ने नामदेव-चरित्र की चर्चा की है । इस प्रकार
की सामग्री विपुल है । परन्तु कहा नहीं जा सकता कि इस सामग्री से उनका संपूर्ण
तथा विश्वसनीय चरित्र उपलब्ध होगा ही । नामदेव के चरित्र के इन अध्येताओं द्वारा
दी गई जानकारी कही अधूरी है तो कही सदोष । कुछ स्थलों पर तो उसकी पुनरुक्ति
भी हुई है । इन कारणों से नामदेव की विस्तृत तथा विश्वासार्ह जीवनी का अभाव
बहुत खटकता है । अतः नामदेव विषयक उपलब्ध सभी सामग्री का अध्ययन और
विश्लेषण कर उनका जीवन चरित्र प्रस्तुत करने का प्रयत्न यहाँ किया गया है ।
अब प्रश्न यह है कि हिंदी में रचना करने वाले नामदेव ज्ञानेश्वर कालीन