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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

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४० नामदेव की हिन्दी कविता
था । गोरख ने अपने पंथ का प्रचार देश के पश्चिमी भागो मे—राजपूताने और पंजाब
में किया ।
गोरखनाथ का समय
गोरखनाथ का काल निर्णय करते समय विद्वानों के बीच परस्पर मतभेद हो
जाता है । सामान्यतः इस सम्बन्ध में चार मत मिलते हैं—
१. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का मत, जिसमे डॉ० रामकुमार वर्मा और डॉ०
धर्मेन्द्र शास्त्री भी सहमत हैं—गोरख का समय १३ वी शती का
मानता है ।¹
२. डॉ० श्याम सुन्दरदास का मत जो गोरख को १४ वी शती का
मानता है ।२
३. पं० हजारीप्रसाद द्विवेदी और स्व० डॉ० पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल का मत
जो गोरख को १० वी शताब्दी का मानता है ।३
४. धी राहुलजी का मत जो गोरख को १० वी शती के अंतिम चरण का
मानता है ।४
ज्ञानदेव की परंपरा
गोरख को १३ वी शती का सम-सामयिक मानने के लिए सबसे बड़ा और सबल
प्रमाण ज्ञानदेव बतलाई वह नाथ परम्परा की सूची है जिसमें उन्होंने अपने को नाथ
परम्परा में मानते हुए अपने पूर्व के नाथो की एक सूची दी है । वह सूची इस
प्रकार है ।५
आदिनाथ, मत्स्येंद्रनाथ, गोरखनाथ, गैनीनाथ, निवृत्तिनाथ और ज्ञानदेव ।
ज्ञानदेव महाराष्ट्र के संत थे जो अलाउद्दीन (समय संवत् १३५८) के समकालीन
थे । उपरिलिखित महाराष्ट्र परम्परा के अनुसार गोरखनाथ का समय महाराज पृथ्वीराज
के पीछे आता है ।
१. हिन्दी साहित्य का इतिहास : रामचन्द्र शुक्ल, पृ० १६ ।
२. हिन्दी साहित्य, पृ० ६० ।
३. नाथ संप्रदाय : डॉ० हजारीप्रसाद द्विवेदी, पृ० ६६ ।
४. 'गोरख सिद्धांत संग्रह', पृ० ४० ।
५. हिन्दी साहित्य का इतिहास, रामचन्द्र शुक्ल, पृ० १८ ।