सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
पृष्ठ 317, कुल 332 में से
संदर्भ में पढ़ेंनामदेव का साहित्य पर प्रभाव १२५
को प्राप्त होते हैं ।¹
कबीर साहब कहते हैं कि कथनी खाँड के समान मीठी है परन्तु करनी प्रत्यक्ष
जहर का घूट है। मनुष्य यदि लम्बी चौड़ी बातें करना छोड़ दे और कृति को महत्त्व
दे तो विष का अमृत बन जाय ।²
सहजावस्था की उपलब्धि होने पर अपनी पाँचों ज्ञानेन्द्रियाँ पूर्णतः अपने कहने
में आ जाती हैं और ऐसा प्रतीत होने लगता है कि हमें स्वयं परमात्मा का ही स्पर्श
अथवा प्रत्यक्ष अनुभव हो रहा है।³ अब कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं रह
जाता। जैसा मुख से निकलता है वैसा ही अपना दैनिक व्यवहार भी चलता है।
संत रज्जब भी करनी तथा कथनी की एकता पर बल देते हैं। वे कहते हैं कि
औषधि बिना पथ्य की तथा पथ्य बिना औषधि किस काम की ? यदि नामस्मरण
और कृति में मेल न हो तो दोनों की प्रशंसा नहीं होती ।⁴
(१) भक्त की भगवान के प्रति मिलन-उत्कंठा—नामदेव के पदों में भक्त की
भगवान के प्रति मिलन की उत्कंठा की मधुर अभिव्यक्ति है। इसे वे "तालावेली"
शब्द से परिचित कराते हैं, जिसका अर्थ व्याकुलता है, ऐसी व्याकुलता जिसमें तीव्रता
है—आतुरता है। यह तालावेली उस प्रकार की है, जिस प्रकार की गाय की बछड़े के
बिना होती है और मछली की पानी के बिना होती है।⁵
१. जैसी मुखतैं नीकसै तैसी चालै नाहि।
मानिष नाहिं ते श्वान गति बाध्या जमपुर जाहिं॥
—कबीर ग्रन्थावली, पृष्ठ ३८।
२. कथनी मीठी खांडसी करनी विष की लोय।
कथनी तजि करनी करै विष तैं अमृत होय॥
—कबीर वचनावली, पृष्ठ २४।
३. जैसी मुखतैं नीकसै तैसी चालै चाल।
पारब्रह्म नेड़ा रहे पलमें करै निहाल॥
—कबीर ग्रन्थावली, पृष्ठ ३८।
४. औषध बिन पथ्य का करे, पथ्य बिन औषधि वादि।
यूं सुमिरन सुकृत अमिल, उभे न पावहिं दादि॥
—संत काव्य, पृष्ठ ३४०।
५. मोहि लागति तालावेली॥
बछरे बिनु गाइ अकेली॥
पानीआ बिनु मीनु तलफे॥
ऐसे रामनामा बिनु बापुरो नामा॥ —पंजाबातील नामदेव, पृष्ठ १०७।