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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 295, कुल 332 में से

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पृष्ठ 295

नामदेव का साहित्य पर प्रभाव २०३
८७२ २४ से २९ तक
८७२ ३० से ३३ तक
९६० ३४ से ३६ तक
११०३ ३७
११६४ ३८ से ४८ तक
११६८ ४६
११६५ ५० से ५२ तक
१२५१ ५३ से ५५ तक
१२६१ ५६ से ५७ तक
१३१८ ५८
१३४६ ५६ से ६१ तक
श्री गुरु ग्रन्थ साहब में पदो का विभाजन रागो, महलो और घरों में हुआ है।
'ग्रन्थ' की सूची में ही दिया है कि किस पृष्ठ पर नामदेव के पद हैं। गुरु नानक तथा
अन्य गुरुओ के पदों के लिए सूची में नाम नहीं है। शेष सभी सन्तो के नाम और पृष्ठ
दिये गये हैं। जिन रागो और पदो के लिए सूची में किसी का नाम नही है वे सभी पद
गुरु नानक तथा सिक्ख गुरुओं के हैं।
यहाँ एक प्रश्न स्वभावतः उठता कि सिक्खो के धार्मिक ग्रन्थ में महाराष्ट्रीय संत
नामदेव के हिन्दी पदो का संग्रह क्यो किया गया ? 'श्री गुरु ग्रन्थ साहब' में गुरु नानक
तथा अन्य सिक्ख गुरुओं के अतिरिक्त कबीर, नामदेव, त्रिलोचन, वेणी, जैदेव, रविदास,
शेख फरीद आदि की रचनाएँ संग्रहीत है। श्री नानक और कबीर के बाद संत नामदेव
के ही पद अधिक हैं, जिससे यह प्रमाणित हो जाता है कि सन्त नामदेव की हिन्दी
रचनाएँ श्री गुरु ग्रन्थ साहब के संकलन के समय प्रसिद्धि प्राप्त कर चुकी थी। सन्तो की
परम्परा में अन्य भी अनेक सन्त हुए होंगे किन्तु श्री गुरु ग्रन्थ के संकलनकर्त्ता ने इन्ही
सन्तो के रचनाएँ संकलित कीं। निश्चय ही ये सन्त इस समय तक जन मानस में स्थान
बना चुके थे। सन्त नामदेव यद्यपि महाराष्ट्रीय सन्त थे और उनकी रचनाएँ भी पर्याप्त
नही थी फिर भी वे 'श्री गुरु ग्रन्थ' के संकलन में महत्त्वपूर्ण स्थान पाने को अधिकारी
हुए।
निर्गुण पन्थ के आदि प्रवर्तक संत नामदेव की रचनाओं को 'श्री गुरु ग्रन्थ
साहब' में स्थान मिलना आश्चर्य की बात नही है क्योकि उन्होने अपनी भक्ति-साधना
और हिंदी पदो के द्वारा तत्कालीन सन्त समाज में बहुत ऊँचा स्थान प्राप्त कर लिया था।
यहाँ एक बात और विचारणीय है। जिस समय 'श्री गुरु ग्रन्थ साहब' का
संकलन हुआ था उसका स्वरूप साम्प्रदायिक नही था। गुरु अर्जुनदेव ने तत्कालीन