सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
DevanagariHindipublished332 पृष्ठ
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: it has a single slanted line ending in a dot: that is ो (o-matra), NOT ौ (au-matra). So गो.
Look at the middle: व with a dot inside/above: वं.
Look at the first letter: ध.
So it is धवंगो.
- Wait, is it "विश्वविद्यालय )" with a space before parenthesis? Yes,
विश्वविद्यालय ). - Is it
पृष्ठ ३१८ ।? Yes,पृष्ठ ३१८ ।.
- Final Polish on Structure and Formatting:
- Add line numbers
,, etc. for each line on the page. - Ensure exact match with the original layout and line breaks.नामदेव का साहित्य पर प्रभाव ३०१
आचार्य विनयमोहन शर्मा के अनुसार नामदेव हिंदी के अपने समय के (१)
निर्गुण भक्ति के प्रथम प्रचारक और (२) हिंदी में गीत शैली के प्रथम गायक कहे जा
सकते हैं।¹
सन्त पीपा नामदेव के कर्तृत्व का गौरव इन शब्दों में करते हैं—
जै कलि नाम कबीर न होते ।
तौ लोक वेद अरु कलि जुग मिलि करि भगति रसातल देते ॥
हमसे पतित कहाँ क्या कहते, कौन प्रतीति
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