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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 289, कुल 332 में से

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पृष्ठ 289

नामदेव का साहित्य पर प्रभाव २६७
नामदेव की लोकप्रियता का एक प्रमाण यह भी है कि उत्तरी भारत के
निम्नलिखित उनके परवर्ती संत कवियों ने बड़ी श्रद्धा के साथ उनका स्मरण किया है—
कबीर ने नामदेव का नाम शुक, उद्धव, शंकर आदि ज्ञानियों के साथ
लिया है—
जागे सुक उधव अकूर हणवंत जागे ले लंगूर ।
संकर जागे चरन सेव, कलि जागे नामा जैदेव ॥१
कबीर के अनुसार वास्तव में गुरु कृपा से भक्ति साधना करते समय प्रेम का
रहस्य केवल नामदेव तथा जयदेव ही जान सके थे—
गुर परसादी जैदेव नामा प्रगटि कै प्रेम इन्हें कै जाना ।२
नामा कबीर सु कौन थे कुन रांका बांका।
भगति समानो सब घरनि तजि कुल काना क॥३
—रज्जब
जैसे नाम कबीर जो थौं साधु कहाया ।
आदि अंत लौ ध्याइकै राम राम समाया ॥४
—स्वामी सुंदरदास
नामदेव कबीर जुलाहो जन रैदास तिरे।
दादू वेगि बार नहिं लागे, हरि सौं सचै सरै ॥५
—दादू दयाल
धू प्रह्लाद कबीर नामदेव पाषांड कोई न राख्या ।
बैठि इकंत नाव निज लीया वेद भागोत यूँ भाख्या ॥६
—बषनाजी ।
नामदेव, कबीर, तिलोचन, सधना, सैनु तरे।
कहि रविदास सुनहु रे संतों, हरि जीव ते सभै सरै ।७
—रैदास ।
१. कबीर ग्रन्थावली (प्रस्तावना), —पृ० १५ ।
२. कबीर ग्रन्थावली, —पृ० ३२८ ।
३. संत सुधासार, —पृ० ५२० ।
४. संत सुधासार, —पृ० ५६० ।
५. संत सुधासार, —पृ० ७४१ ।
६. संत सुधासार, —पृ० ५४३ ।
७. संत सुधासार, —पृ० १८३ ।