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सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 288, कुल 332 में से

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पृष्ठ 288

२६१ नामदेव की हिन्दी कविता
संत तुकाराम ने भी नामदेव को अपने काव्य का प्रेरणा स्रोत बताया है ।¹
संत निलोबा राय ने अन्य संतों के साथ नामदेव का सादर स्मरण किया ।²
नामदेव के पदों के कवित्व के सम्बन्ध में स्वर्गीय प्रोफेसर वासुदेव बलवन्त
पटवर्धन ने बंबई विश्वविद्यालय की विल्सन फायलॉलाजिकल व्याख्यान-माला में ये
विचार प्रकट किये थे—
'नामदेव की कविता में हमें उस प्रकाश के रोमांस का अनुभव होता है जो
समुद्र या धरती पर कभी नहीं उतरा, उस स्वप्न के दर्शन होते हैं जो इस मिट्टी की
धरती पर कभी नहीं झलका । उस प्रेम की प्रतीति होती है जिसने कभी वासना को
उत्तेजित नहीं किया । उसमें तो करुणा, विश्वास और भक्ति का 'रोमांस' है तथा मानव-
आत्मा का प्रेम तथा परमात्म शक्ति के प्रति आत्मसमर्पण है । उसमें हम भक्ति अथवा
आध्यात्मिक प्रेम का रोमांस, हृदय का हृदय के प्रति संगीतमय निवेदन और उद्वेलित
भावातुर हृदय के उद्गार पाते हैं ।'³

१. नामदेवें केले स्वप्नामाजी जागे । सवें पांडुरंगे येऊनियां ॥
सांगीतले काम करावें कवित्व । वाउगे निमित्त बोलो नये ॥
—तुकारामाचा गाथा, अभंग ३७३३ ।
२. निवृत्ती ज्ञानेश्वर सोपान । नामा सजंना जाल्हण ॥
कूर्मा विसोबा खेचर । सावता चांगा वटेश्वर ॥
कबीर सेना सूरदास । नरसी मेहेता भानुदास ॥
निला म्हणे जनार्दन एका । देवचि होऊन ठेला तुका ॥
—सकल संत गाथा, संत माहात्म्य ।
3 Here we have the Romance of a light that never was on sea or
land, of a dream that never settled on the world of clay, of love
that never stirred the passion of sex Here is the Romance of
the piety, of faith and devotion of surrender of human soul in
the love, the light and the life of the ultimate being It is a
Romance of Bhakti or Spiritual love that we have here It is
the heart's song to the heart It is the outburst of the contents
of the heart under excitement when the heart is touched or
stirred or thrilled or roused into passionate life '
—श्रीनामदेवचरित्र (पुनर्मुद्रण १६५२) रं० ह० भालुकर ।
प्रस्तावना (पृ० ७४ ७५) से उद्धृत