सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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यह स्मारक स० १५०७ में बनकर तैयार हुआ। इस ऐतिहासिक तथ्य के आधार पर
कबीर और बिजली खाँ का सम्बन्ध पूर्णतः प्रमाणित हो जाता है।
इस संदर्भ में आचार्य परशुराम चतुर्वेदी की शंका दृष्टव्य है।१
कबीर के काल निर्णय के सम्बन्ध में डॉ० राजनारायण मौर्य का निष्कर्ष ठोस
प्रमाणों पर आधारित तथा सुचिंतित प्रतीत होता है।२
ऊपर इस बात का उल्लेख हो चुका है कि जनश्रुति कबीर का जन्म-काल
स० १४५५ तदनुसार सन् १३९८ ई० तथा उनका मृत्युकाल स० १५७५ तदनुसार
सन् १५१८ ई० मानने के पक्ष में है।
नामदेव का जन्म काल सन् १२७० ई० और मृत्यु काल सन् १३५० ई० है।
इस प्रकार नामदेव का जन्म कबीर से १२८ वर्ष पूर्व हुआ था। इतना ही नहीं नामदेव
के मृत्युकाल और कबीर के जन्म-काल में भी ४८ वर्षों का अन्तर है। अतः यह निर्विवाद
सिद्ध हो जाता है कि नामदेव का काल कबीर के काल से एक शताब्दी पूर्व था।
ऐसा विश्वास किया जाता है कि उत्तर भारत में भक्ति मार्ग को रामानन्द ले
आये थे। सौभाग्य से उनको कबीर जैसा शिष्य मिल गया था। कबीर के अनुयायियों
१. 'उपलब्ध सामग्रियों पर विचार करते हुए इस प्रकार का निर्णय करने वालो की
प्रवृत्ति इधर कबीर साहब के जीवनकाल को क्रमशः कुछ पहले की ओर (सं०
१४५५-१५७५) ही ले जाने की दीख पड़ती है। ऐसी दशा में कभी-कभी अनुमान
होने लगता है कि उक्त समय (कबीर का काल) कही (स० १४२५-१५०५) के
ही लगभग सिद्ध न हो जाय।'
—उत्तरी भारत की संत परम्परा, पृ० १३६।
२ 'ऊपर के सभी तथ्यों का यदि पूर्णरूपेण विश्लेषण किया जाय और ऐतिहासिक
दृष्टि से भी विचार किया जाय तो सेंट्रल लायब्रेरी पटियाला से प्राप्त हस्तलिखित
ग्रन्थ में दिया हुआ कबीर का काल ही ठीक जान पड़ता है।'
'श्री चतुर्वेदी जी के पास ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं था जिसके आधार पर वे
कबीर का काल स० १४०५-१५०५ बता सकते। किन्तु उन्हे लगने लगा कि स०
१४५५-१५७५ वाला कबीर का काल पूर्णतः प्रामाणिक नहीं है। इसीलिए उन्होंने
संदेह प्रकट किया कि कही स० १४२५-१५०५ के लगभग कबीर का काल न हो।
मैं समझता हूँ कि अब एक प्रमाण मिल गया है और उसके आधार पर स० १४०५-
१५०५ तक कबीर का काल मानने में कोई हर्ज नही है। मैं स्वयं कबीर का यही
काल मानता हूँ।'
—'हिन्दुस्तानी' वर्ष ३२।